Posts tagged बुरबकई
झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
Jul 3rd
जब मैं छोटा बच्चा था, कभी शरारत नहीं करता था.. ढँग की जब कोई बात सुने ना, फिर मैं दँगा करता था आज मेरा मन निट्ठल्ला डीप-रेस्ट है, मैंनें दू-दुगो पोस्ट लिक्खड्डाली.. और एक सब्सक्राइबर तक झाँकने न आया । ऍग्रीगेटर के टोट्टे में सब अपनी अपनी टिप्पणी गिनने में व्यस्त हैं… इधर अपने को दँगा करने का मन हो रैया है । टूँऊँउ ऊँ, जिन्हें नाज़ था बेलागिंग की बुलन्दियों पर.. कहाँ है, कहाँ है, कोहाँयऽ हँयऽऽऽ.. कोहाँय हँय टूँऊँउ ऊँ, ऊँउँ.. वो मठाधीशों की धौंसें, वो एसोशियन… आगे पढ़िये
आज कंमेंटियाने की ज़िद ना करो…
Apr 26th
इतने दिनों की ग़ैरहाज़िरी की भरपायी करने की ठान रखी थी, सोचा कि आज दो नये पोस्ट अवश्य दूँगा । मेरे सँकल्प को जब नींद टँगड़ी मारने लगी तो, सोने से पहले अम्मा को हिदायद दी कि, एक ज़रूरी काम है.. सो मुझे तीन बजे जगा दीजियेगा । घर में बूढ़े-बुज़ुर्ग होने का यह एक फायदा तो है ही कि, उनसे ऍलार्म का काम बखूबी लिया जा सकता है । फिर यह तो ठहरीं, ढीले स्प्रिंग की बिगड़ी हुई घड़ी ! अल्ल्सुबह पौने तीन बजे ही इन्होंनें टुन्नु टुन्नु की ऎसी रट लगायी कि उठना ही पड़ा… दिल लगाया ब्लॉगिंग से तो चैन क्या चीज़ है .. पहले तो अज़ीब आदमी से दो-चार होने का फैसला लिया, बेचारा वेबलॉग उपेक्षित पड़ा है । इस अज़ीब आदमी… आगे पढ़िये
ग़र होश जरा सा अब तक है फ़ाग़ी.. होश तू अपना तौल !
Mar 2nd
लगा कि ये साल वी सुक्खा-सुखियाँ ही निकल जाने को है, पर वह न हुआ । अपना आज कुछ ऎसा डौल लग गया कि, लगदा है आज सब बेडौल ही लिक्खा जावेगा ।
ऒऎ कोई नहीं, वो तो जैसे ही सन्दीप ने एक ठोका, यो लाग्या कि अब आगया मौका. लेकिन जैसे ही भाई परभजोत ने तीसरा ठोका, दिल इस कदर बल्ले बल्ले होया, कि इक माहौल बन गया.. ना जी, ये तो सेलेब्रेट का मामला है, मौका और माहौल दोनों आन मिले उम्मीद थी कि गला-वला तर करने को आज गृह मँत्रालय से अँतरिम राहत मिल जायेगी । पर सनम जी ?
वह तो झू्ठियों की सरदार निकलीं । चहक कर उचकीं, ऒऎ क्या बात है, " चक दे इँडिया !" और पलट कर मेरी … आगे पढ़िये
माडरेशन की प्रतीक्षा में
Sep 6th
इस पहेली को हल करने के प्रयास में मुझे एक घटना याद आ गयी, दो दोस्त आपस में उलझे हुये थे, शायद उन्हें कुछ लगी हुई थी । पहले ने कहा, " अगर मैं चाहूँ तो, तुम्हारे ऊपर पेशाब भी कर दूँ और तू भीगेगा भी नहीं !" दूसरा उखड़ गया, " भला ऎसा कैसे हो सकता है ?" हो सकता है.. नहीं हो सकता है कि तू तू मैं मैं चलने लगी, दस बीस तमाशबीन इकट्ठे हो गये । पहले ने कहा, " चाहे तो शर्त लगा ले ।" दूसरा भड़क गया, " ऎसी अनहोनी पर शर्त क्यों लगा लूँ ?" अब शर्त लगा ले.. और शर्त क्यों लगा लूँ.. की नोंक-झोंक चलने लगी । किसी ने सुझाया, अरे आज़मा ले भाई , शर्त लगाने में क्या जाता है… आगे पढ़िये
चले जाना नहीं, होश उड़ाय के
Aug 23rd
मेरे मित्र डा. एस.एम. सिंह, यहाँ एक सफल आर्थोपेडिक सर्ज़न हैं । कभी वह कार्टूनिंग में दखल रखा करते थे । पर जैसा कि इस पेशे में होता है , अधिकाँश जन अपने शौक, ललित प्रतिभा और मनोलालसा को इस पेशे की बलि देने से रोक नहीं पाते । लगातार उकसाये जाने पर वह पिछले कुछ वर्षों से छिटपुट स्तर पर सक्रिय हो पाये हैं । कल्पना के धनी हैं, फिर भी शायद सौजन्यवश मुझसे भी कार्टून आइडिया की माँग कर बैठते हैं । और उसे पूरा भी करते हैं । प्रस्तुत है, उनके द्वारा रेखाँकित यह बानगी !
बहुधा यह सुनने में आता है, कि कुछ लेन-देन के मसलों को लेकर मरीज़ आपरेशन टेबल से वापस आ जाता… आगे पढ़िये
भईया, तनि हमारौ एकु फोटू चीन्ह देयो
Jul 29th
पहेली बूझाने मैं तो आयी.. कहते हैं इसको चीन्हा-चिन्हाई ! चीन्हा-चिन्हाई … चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू ब्लागिंग भई है, बमचिकाचिक… त हमहूँ भये हैं, बमचिकाचिक । बमचिकाचिक देखो फोटू बमचिकाचिक ! चीन्हा-चिन्हाई … चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू आजकल बड़ा बूझा और बुझाया जा रहा है, सोचा निट्ठल्ले बैईठ से तो अच्छा है कि, हमहूँ कुछौ बूझि जाँचि लेयी.. कल हो ना हो ! वो क्या है कि,
कहते हैं ना ..यह ब्लागर की बस्ती है..यहाँ पोस्ट मँहगी और टिप्पणियाँ सस्ती है । सो, अँतरिम राहत के लिये एक सस्ते दरों का पोस्ट दिया जा रहा है, निर्वाह कीजिये ।
यह ख़ानम बीते हुये ज़माने की खँडहर नहीं, क्योंकि यह स्वयँ ही… आगे पढ़िये
अनटाइटिल्ड !
May 1st
आज यहाँ मतदान का दिन था । हुँह, मतदान .. हम करें दान, ताकि वह कर सकें जनकल्याण ! बेहन माया ने सुबह सुबह मतदान किया ! मीडिया ने पर्याप्त कवरेज़ भी दिया ! अभी स्पष्ट ही नहीं है, 16-17-18-19 मई ( मोटामोटी बाद के बाद यह तीन दिन कुछ मोलभाव के रखिये न, भाई ! )जाने कौन प्रकट कृपाला – दीनदयाला आ जाँय और इन्हें नये सिरे से उनकी विरुदावली रचनी पड़ जाये ! फाइलों में कुछ तो रिकार्ड यह भी रखेंगे कि नहीं ? यही तो है, इनके तरकश के तीर ! खैर.. मुझे क्या, यह उनकी प्रोब्लेम है !
सो, मतदान महापर्व पर आज पूरी छुट्टी मनाई ! ब्लागर से विद्रोह कर आज एक भरी पूरी पिक्चर भी देख डाली, क्योंकि अपुन ने तो डाक… आगे पढ़िये



