Posts tagged टिप्पणियों पर
नो.. नो.. नो.. दर्पण दर्शन क्यों ?
Sep 9th
आज सुबह सोकर उठा..वह तो देर सबेर सभी उठते ही हैं, ख़ास बात क्या है ? लेकिन आज मेरा मन कुछ भारी था, अनमना सा बाहर पड़ी कुर्सी पर बैठा शरीफ़े में आते हुये फूलों की कलियाँ गिन रहा था । वह बगल में खड़ी हो जैसे आर्डर ले रही हों, “ ब्लैक टी या नींबू पानी ? ” कुछ ज़वाब दूँ कि उससे पहले ही वह पत्नी-अवतार में दरस दे दिहिन, “ जो बोलना है, जल्दी बोलो.. अभी बहुत काम है । अभी नहाया भी नहीं हैं, तुम मैक्सी में घूमते देख चिल्लाने लगोगे !
सुघड़ पत्नियाँ पति का ज़वाब सुनने का इंतेज़ार नहीं किया करतीं, सो एक फ़रमान जारी करते हुये पलट गयीं, “ चाय बना देती हूँ !” मुझे तुमसे कुछ भी न चाहिये आगे पढ़िये
ज़ाकिर भाई.. ओ ज़ाकिर भाई !
Aug 15th
ज़ाकिर भाई, आपकी पोस्ट देर से देख पाया । सटीक प्रश्न उठाया है, आपने । और मैं आपकी बेबाक दृष्टि का कायल भी हूँ । पहले तो मैं स्पष्ट कर दूँ कि, मैं आस्थावान सनातनी हिन्दू हूँ । बहुत सारे वितँडता और प्रत्यक्ष , अप्रत्यक्ष अनुभवों के बाद मैंने पूजा करना छोड़ दिया है । इस पर एक पोस्ट लिखने की इच्छा भी है, पर समय और विषयवस्तु में सँतुलन नहीं बन पा रहा है ।
आपकी पोस्ट में गायत्री मँत्र का जो अर्थ दिया है, वह वास्तव में इसका अनर्थ है । प्रचोदयात वैदिक सँस्कृत की धातु है, जिसका तात्पर्य " हमें अग्रसर करें.. हमें… आगे पढ़िये
जिन्दगी की रेल कोई पास कोई फेल
Jul 8th
आज अभी चँद मिनटों पहले एक पोस्ट पढ़ी.. निठल्ले , सठेल्ले और …………ठल्ले
उब दिनों एक गाना सुना करता था, उसे अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ भी लिया ( अभी ईस्वामी की टिप्पणी के बाद यह अँश जोड़ा है.. धन्यवाद स्वामी ! )
तो एक गाना सुना करता था.. " जिन्दगी की रेल कोई पास फेल.. अनाड़ी है कोई खिलाड़ी है कोई " बस इसी को पकड़ लिया, " रेल जब हुईहै, तौनि डब्बवा भी हुईबे करि… डब्बवा मा जब हुईहैं जगह तो सवारिन केरि लदबे करी… , सवारिन केरि लदबे करीऽऽ भईया सवारिन केरि लदबे करीऽऽ "
बस इसी को पकड़ लिया, इसके दर्शन को आत्मसात कर लिया.. लगे हुये डिब्बों को परखा, फ़र्स्ट किलास.. सेकेन्ड किलास, जनता, पैसेन्ज़र, … आगे पढ़िये
अप्रासँगिक स्वगत कथन
May 7th
सुबह सुबह अख़बार पढ़ दिन ख़राब करने से बेहतर लत है, चिट्ठाचर्चा ! आदत के मुताबिक आज भी पलटाया तो ..
" उपस्थित श्रीमान / मैडम साथ एक बेहतरीन लिंक लेकर अनूप जी को पाता हूँ, ”
जो कि स्वयँ में चर्चाकार का ही टैगलाइन है, और बहुत अच्छा है
बड़ा भला लग रहा है, चुहल सूझ रही है..कि एक पोस्ट लिखूँ, " आओ सखि, लिंक मिलि बाँटैं " कौन जानता है, कब समय मिल पाय… अभी ही लिख लेता.. लेकिन सिंह साहब की पत्नी नीरू किसी काम से पँडिताइन से मिलने आयीं हैं, और जम कर बैठ गयीं, क्योंकि उनके पास टैम नहीं है (यदि होता.. तो शायद एक अदद बिस्तर और डोलची के संग पधारतीं ! ) अपना प्रिय… आगे पढ़िये
अनटाइटिल्ड !
May 1st
आज यहाँ मतदान का दिन था । हुँह, मतदान .. हम करें दान, ताकि वह कर सकें जनकल्याण ! बेहन माया ने सुबह सुबह मतदान किया ! मीडिया ने पर्याप्त कवरेज़ भी दिया ! अभी स्पष्ट ही नहीं है, 16-17-18-19 मई ( मोटामोटी बाद के बाद यह तीन दिन कुछ मोलभाव के रखिये न, भाई ! )जाने कौन प्रकट कृपाला – दीनदयाला आ जाँय और इन्हें नये सिरे से उनकी विरुदावली रचनी पड़ जाये ! फाइलों में कुछ तो रिकार्ड यह भी रखेंगे कि नहीं ? यही तो है, इनके तरकश के तीर ! खैर.. मुझे क्या, यह उनकी प्रोब्लेम है !
सो, मतदान महापर्व पर आज पूरी छुट्टी मनाई ! ब्लागर से विद्रोह कर आज एक भरी पूरी पिक्चर भी देख डाली, क्योंकि अपुन ने तो डाक… आगे पढ़िये
कभी कभी मेरे दिल में..
Apr 29th
…. यह ख़्याल आता है कि, ब्लागिंग में मुआ ब्लागर आख़िर करता क्या है … क्या केवल यही तो नहीं, कि " रमैया तोर दुल्हिन लूटै बजार " ? शायद ऎसा नहीं ही होगा.. काहे कि सदियन पाछै कबीरौ पलटि के ठोकिं गये रहें,
" हम तुम तुम हम और न कोई । तुमहि पुरुष हम ही तोर जोई ॥ " ब्लागर के जोई का कोई सगा सम्बन्धी क्यों न हो ? सो, ब्लागस्पाट की मेहरारू और पाठकों की भौजाई बने बिना ब्लागिंग करना दिनों दिन जैसे दुष्कर होता जा रहा है.. ( छिमा करो, माता ! ) … आगे पढ़िये
मत मानो मेरा मत, पर यह मत कहना कि मत नहीं दिया था
Apr 11th



