Posts tagged जात न पूछौ साधु की
एक एक्कनम एक, दो दूनी चार, तीन तियाँ नौ.. ..
May 3rd
ई लेयो, दुनिया चैन से रहने भी न दे.. और पूछे ’ बेचैन क्यों रहते हो ? " हम पहले ही ब्लागर से मोहोबत करके सनम.. रोते भी रहे.. हँसते भी रहे गुनगुनाय रहे थे, कि आजु एकु मोहतरमा हमसे पूछि बैठीं, " क्षमा करें डाक्साब, आप काहे के डाक्टर हैं ? " अब जानवरों के डाक्टर होते तो अपने प्रिय ब्लागर भाईयों के लिये क्यों लिखते ? हम भी किसी चुनावी जनसभा में भाड़े की जुटी भीड़ में शामिल मिमिया रहे पब्लिक से मुख़ातिब होते, या अपनी पढ़ाई-लिखाई का भरपूर दुरुपयोग करते हुये कहीं चैनल-नवीसी कर रहे होते ! और कुछ नहीं तो.. ’ नखलऊ लायब्रेरी में लोकसाहित्य की अनुपब्धता ’ पर एक्ठो शोध का जुगाड़ करके मेहता अँकल के गाइडेन्स में एक दूसरे किसिम की डाक्टरी का जुगाड़… आगे पढ़िये
बचना, ओऽ ..ऽ ख़बीसों….लो मैं आ गयाःऽ
Apr 22nd
लोजी लो, मैं तो राँची से लौट भी आया, अब कहोगे कि अपनी मनगढ़ंत पूरी करो । सो, पूरी तो करना ही पड़ेगा वरना सबलोग क्या कहेंगे ? यही ना कि दो दो ब्लाग का बयाना लिये पड़ा है, वहाँ ‘ काकचरितम’ अधूरी छोड़, एक मनगढ़ंत पोस्ट को भी अधर में टाँग कर यहाँ टहल रहा है । कल की पैदाइश और ख़लीफ़ागिरी चालू ! बाँयीं आँख भी सुबह से फड़क रही है, इधर शीर्षक में भी ख़बीस घुस आया है, अल्लाह जाने क्या होगा आगे ? कोई भी जीवित या मृत बंधु ख़फ़ा न हों ।… आगे पढ़िये
जात न पूछ साधो की
Mar 13th
" यह इंसान कहलाने वाले चोंचले उन तक ही रहने दे, यार ! "
अभी तो मेरी पोस्ट शुरु भी नहीं हुई और यह अनपढ़ बंदर कमेंटियाने लगे । शायद ज़ाहिल हैं इसीलिये इस ज़ाहिली पोस्ट पर बेवज़ह उछलने लगे। अरे भाई, पढ़े-लिखों की शालीनता इसी में रह्ती है कि चुप रहो और तेल देखो, तेल की धार देखो, बोलोगे तो लिखे पढ़े होने का भेद खुल जायेगा ।
बंद करो, यह बेतुकी बंदर पुराण, अपने मतलब पर आओ । वही तो ! फिर बता कर ही जाइये कि यह ब्लागर बिरादरी अपनी भारतीय वर्ण-व्यवस्था में किस वर्ग में रखा जायेगा ? हमको तो जन्म से यही… आगे पढ़िये



