Archive for July, 2010
झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
Jul 3rd
जब मैं छोटा बच्चा था, कभी शरारत नहीं करता था.. ढँग की जब कोई बात सुने ना, फिर मैं दँगा करता था आज मेरा मन निट्ठल्ला डीप-रेस्ट है, मैंनें दू-दुगो पोस्ट लिक्खड्डाली.. और एक सब्सक्राइबर तक झाँकने न आया । ऍग्रीगेटर के टोट्टे में सब अपनी अपनी टिप्पणी गिनने में व्यस्त हैं… इधर अपने को दँगा करने का मन हो रैया है । टूँऊँउ ऊँ, जिन्हें नाज़ था बेलागिंग की बुलन्दियों पर.. कहाँ है, कहाँ है, कोहाँयऽ हँयऽऽऽ.. कोहाँय हँय टूँऊँउ ऊँ, ऊँउँ.. वो मठाधीशों की धौंसें, वो एसोशियन… आगे पढ़िये



