Archive for April, 2010
आज कंमेंटियाने की ज़िद ना करो…
Apr 26th
इतने दिनों की ग़ैरहाज़िरी की भरपायी करने की ठान रखी थी, सोचा कि आज दो नये पोस्ट अवश्य दूँगा । मेरे सँकल्प को जब नींद टँगड़ी मारने लगी तो, सोने से पहले अम्मा को हिदायद दी कि, एक ज़रूरी काम है.. सो मुझे तीन बजे जगा दीजियेगा । घर में बूढ़े-बुज़ुर्ग होने का यह एक फायदा तो है ही कि, उनसे ऍलार्म का काम बखूबी लिया जा सकता है । फिर यह तो ठहरीं, ढीले स्प्रिंग की बिगड़ी हुई घड़ी ! अल्ल्सुबह पौने तीन बजे ही इन्होंनें टुन्नु टुन्नु की ऎसी रट लगायी कि उठना ही पड़ा… दिल लगाया ब्लॉगिंग से तो चैन क्या चीज़ है .. पहले तो अज़ीब आदमी से दो-चार होने का फैसला लिया, बेचारा वेबलॉग उपेक्षित पड़ा है । इस अज़ीब आदमी… आगे पढ़िये



