Archive for August, 2009
हिल्ले पठनीयता बहाने जन्मदिन
Aug 29th
फ़िलहाल कुछ नहीं लिखने का मन था । अब तो एक धड़का और लग गया है, पठनीयता का ! भला बताइये, आपका निट्ठल्ला अपने टैग को सार्थक करने कहाँ जाये ? मेरी पठनीयता बिन सोचे ही आती है ! इधर उधर से पोस्ट उधार ले लेकर अच्छा ख़ासा ब्लाग-यापन कर रहा था । इतने में लिखने की यह मज़बूरी मुझ पर टूट पड़ी । सो, पठनीयता सिद्धाँत की सादर अवहेलना करते हुये, अपने कम्प्यूटर का कीबोर्ड खटखटा रहा हूँ । देखो, क्या निकलता है ? पढ़ ले, बाद में पछतायेगा, अबहिन झेल सके तो झेल । आगे पढ़िये
चले जाना नहीं, होश उड़ाय के
Aug 23rd
मेरे मित्र डा. एस.एम. सिंह, यहाँ एक सफल आर्थोपेडिक सर्ज़न हैं । कभी वह कार्टूनिंग में दखल रखा करते थे । पर जैसा कि इस पेशे में होता है , अधिकाँश जन अपने शौक, ललित प्रतिभा और मनोलालसा को इस पेशे की बलि देने से रोक नहीं पाते । लगातार उकसाये जाने पर वह पिछले कुछ वर्षों से छिटपुट स्तर पर सक्रिय हो पाये हैं । कल्पना के धनी हैं, फिर भी शायद सौजन्यवश मुझसे भी कार्टून आइडिया की माँग कर बैठते हैं । और उसे पूरा भी करते हैं । प्रस्तुत है, उनके द्वारा रेखाँकित यह बानगी !
बहुधा यह सुनने में आता है, कि कुछ लेन-देन के मसलों को लेकर मरीज़ आपरेशन टेबल से वापस आ जाता… आगे पढ़िये
ज़ाकिर भाई.. ओ ज़ाकिर भाई !
Aug 15th
ज़ाकिर भाई, आपकी पोस्ट देर से देख पाया । सटीक प्रश्न उठाया है, आपने । और मैं आपकी बेबाक दृष्टि का कायल भी हूँ । पहले तो मैं स्पष्ट कर दूँ कि, मैं आस्थावान सनातनी हिन्दू हूँ । बहुत सारे वितँडता और प्रत्यक्ष , अप्रत्यक्ष अनुभवों के बाद मैंने पूजा करना छोड़ दिया है । इस पर एक पोस्ट लिखने की इच्छा भी है, पर समय और विषयवस्तु में सँतुलन नहीं बन पा रहा है ।
आपकी पोस्ट में गायत्री मँत्र का जो अर्थ दिया है, वह वास्तव में इसका अनर्थ है । प्रचोदयात वैदिक सँस्कृत की धातु है, जिसका तात्पर्य " हमें अग्रसर करें.. हमें… आगे पढ़िये
मैं मोटा क्यों हूँ…मैं मोटा क्यूँ हूँ ?
Aug 2nd
समीर भाई टिप्पणीशाह लालउड़नतश्तरीवाला कुछ लिखें, और हम कन्फ़्यूज़ियायें भी न ? ऎसा कम ही होता है.. ज़रूर कहीं कोई निहितार्थ रहा करता है । चतुर सुजान ऎंवेंई ही टाइम खोटी नहीं किया करते.. कुछेक जन ही ऎसे हैं, जिनकी पोस्ट मैं सहेज कर रख छोड़ता हूँ.. और बाद में उसे फूँक फूँक कर चौकन्नी निगाहों से पढ़ता हूँ । खैर.. उनकी विरुदावली चिट्ठाचर्चा समेत कई ब्लाग पर आ चुकी है, सो यह मेरा मकसद भी नहीं है । आज वह अपने उच्च रक्तचाप को लेकर बिसूरते पाये गये.. साथ में मोटापे पर भी सैकड़ों लानते भेज डाले । मुझे लगा कि मैं एक मोटी सलाह दे ही डालूँ.. तीन ’री’ से बचें.. आराम में रहेंगे, हरी ( Hurry ) वरी आगे पढ़िये



