Archive for January, 2009
ऎसी आज़ादी और कहाँ, आज़ाद ख़्याल विवेचन
Jan 31st
विवेक भाई आग लगा कर अगले हफ़्ते के लिये बाई कर गये । गोया, चर्चाकार न हुये ज़मालो हो गये । यह तीसरी बार है, जब मैं इन चिट्ठाचर्चा वालों के उकसावे में पोस्ट लिखने को मज़बूर हो रहा हूँ । भुस्स मे आग लगा कर बी ज़मालो दूर खड़ी ।
मेरी पिछली कई पोस्ट से तो अंदाज़ ही लिया होगा, कि ई डाक्टर धँधे में जैसा भी ठस्स हो, लेकिन यहाँ दिमाग का निख़ालिस भुस्स डम्प करने आता है । भगवान ठस्स भेजा देता, तो ई आग लगबे काहे करती ? सो भगवान दुश्मन के दिमाग में भी ऎसा भूसे का ढेर भर कर न भेजे । इन चर्चाकार ने गणतंत्र-दिवस पर पोस्ट लिखने वालों की पूरी क्लास ले ली । पाखंडम शरणम गच्छामि संस्कृति में … आगे पढ़िये
तुम पार नेट परमेश्वर तुम ही नेट पिता
Jan 18th
ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे फ़्रस्ट (एटेड ) जनों के संकट, त्रस्त जनों के संकट एक क्लिक में दूर करे ॐ जय गूगल हरे… जो ध्यावै सो पावै दूर होवै शंका, स्वामी दूर होवै शंका सब इन्फ़ो घर आवै, सब इन्फ़ो घर आवै कष्ट मिटै मन का ॐ जय गूगल हरे… नेट पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं किसकी तुम बिन और न दूजा, तेरे बिन और न दूजा होप करूं किसकी ॐ जय गूगल हरे… तुम पूरन हो खोजक तुम वेबसाइटयामी, स्वामी तुम वेबसाइटयामी पार नेट परमेश्वर, पार नेट परमेश्वर तुम सबके स्वामी ॐ जय गूगल हरे… तुम ब्लागर. के फ़ादर तुम ही इक सर्चा, स्वामी तुम ही इक आगे पढ़िये
चला बाघ मंत्री बनने !
Jan 14th
सुबह सुबह पंडिताइन ने झकझोर मारा, ” एई उट्ठो.. एई उठो न, देखो बाघ लखनऊ तक आगया ! अरे, मैं तो अपना ही किस्सा लेकर बैठ गया, एक आवश्यक औपचारिकता तो पहले पूरी कर लूँ ! आपसब ब्लागर भाई व भौजाईयों को समस्त उत्तरायण पर्वों की हार्दिक शुभकामनायें ! जिनको भौजाई कहलाने में आपत्ति हो, कृपया नोट करें.. वह मेरी पोस्ट भले न पढ़ें, पर, उनका एतराज़ किसी भी दशा में दर्ज़ नहीं किया जायेगा ! एई उट्ठो.. एई उठो न, देखो बाघ लखनऊ तक आगया ! “ क्या आगे पढ़िये
इतना विशाल देश.. क्या अकेले मेरे बस में ?
Jan 12th
हरतरफ़ चर्चा है, कि देश मुसीबत में हैं, आतंकी इसे रौंद रहे हैं, घोटाले इसे लील रहे हैं ! सत्यम भी आख़िरकार असत्यम साबित हो रहा है । अब, भला आप ही बताइये, मैं अकेला क्या कर सकता हूँ ? कल जोड़ने बैठा तो .. देश की आबादी निकली : 100 करोड़ जिसमें 9 करोड़ तो सेवानिवृत हैं, जिनसे शायद ही कोई उम्मीद हो नौकरीपेशा वर्ग में केन्द्रीय कर्मचारी ठहरे 17 करोड़ और राज्य कर्मचारी हैं 30 करोड़ इनमें शायद ही कोई काम करता हो ? और.. हमारे यहाँ हैं 1 करोड़ आई० टी० प्रोफ़ेशनल ! इनमें अपने आगे पढ़िये
अथ क़ाफ़िर कथा
Jan 12th
अपनी उनके संग सुरक्षित ड्राइविंग … …
Jan 8th
मोबाइल के उपयोग एवं ड्राइविंग के समय टेप से छेड़छाड़ ( डा. अनुराग ) के बाद आपकी उनकी चटर चटर ही एक्सीडेन्ट का एक और मुख्य कारण है ! अपुन के उल्हासनगर के कारग़ुज़ारों ने अनोखा सीट-बेल्ट इज़ाद किया है, जी हाँ.. ख़ालिस Made in USA ! बगल में बैठी ख़ूबसूरत दुर्घटना से आपका कान औ’ ध्यान सुरक्षित .. फिर अगली कोई अनहोनी तो अन + होनी ही समझिये ! पेटीकोट सरकार मान्यता प्राप्त है यह !
इसकी अग्रिम बुकिंग धड़ल्ले से चल रही है, संपर्क करें – अभिषेक ओझा, अथवा श्री ताऊ रामपुरिया इंदौर वाले… आगे पढ़िये
भाई साहब, हैप्पी नियू ईयर टू यू !
Jan 5th
पुरानी पोस्ट है, तो क्या हुआ… 3 जनवरी 2008
हैप्पी न्यू ईयर, सर्र. . . . मैं पलटता हूँ, एक किंचित परिचित चेहरा मेरी तरफ़ मुखातिब मुस्कुराता हुआ दृष्टिगोचर होता है । इनको कहाँ देखा है , दिमाग में चल रहा होता है किंतु ज़ुबान से फिसल पड़ता है, " थैंक यू , सेम टू यू ! " यहाँ ठहरें कि आगे बढ़ जायें ( न जाने किस वेष में आने वाले कल का कोई महामहिम ही हो ), मेरे इस असमंजस से उबरने के पहले ही उनका हाथ मेरी तरफ़ को उठता दिखता है । अब रूकना तो लाज़िमी है । ठिठक कर सोच रहा हूँ, किस तरह पेश आया जाये । उन सज्जन की दृष्टि तो सामने के फुटपाथ पर जाती हुई किसी महिला को आँखों ही… आगे पढ़िये



