Archive for December, 2008
तू क्या कर रहा है, बे ?
Dec 30th
आतंक आतंक आतंक.. आह, आतंक ! यह ससुरा आतंक शब्द ही इतने गहरे पैठ गया है, कि इसको सुनने मात्र से आतंक उभर आता है । न जाने क्यों, मैं इसके पीछे लट्ठ ( अपना लट्ठ है, भाई ) लेकर पिला पड़ा हूँ ! पर, वज़ह क्या व्यक्तिगत है ? नहीं जी.. भला आहत स्वाभिमान लेकर कौन चैन की नींद सो सकता है ? सच ही सोच रहे हैं आप कि, लगता है स्वाभिमान की ठेकेदारी अमर कुमार को ही मिली है ? सत्य वचन महराज़.. जो चला गया उसे भूल जाओ ! पर, मेरी मोटी समझ कहती है कि, अक्षुण्ण भारत की इकाई… आगे पढ़िये
वो अन्डरस्टैंडिंग थी और ये सियासत है !
Dec 22nd
स्थान: सीमा चौकी, इस बार उत्तर-पश्चिम क्षेत्र बात बात पर उबल पड़ने और भारत माँ की सौगंध लेने की आदत के चलते रामनिहारी जाटव अपने बटालियन में रामबवाली भारती पुकारे जाते थे ! हमारे चरित्रनायक रामबवाली जी अब लांसनायक भारती के नाम से पुकारे जाने लगे हैं । दीपावली मनाने दो वर्ष बाद छुट्टियों में घर आये हैं । सब ठीक ठाक गुज़र रहा था, मात्र चार दिन ही रह गये थे, कि बेस से वारंट आगया.. … रिपोर्ट इमिडीयेटली ! बीबी ने उनका सामान बाँधा, उन्होंनें कुलदेवी के सम्मुख सिर पर क़फ़न बाँधा और चल पड़े लाम पर ! रिपोर्टिंग की औपचारिकतायें पूरी हुईं, एक संक्षिप्त मीटिंग… और यह तय पाया गया कि जिसको जिस क्षेत्र की अधिक जानकारी है,उन्हें वहीं भेजा जाय ! आज लगभग दस दिनों बाद… आगे पढ़िये
चैट्क्क.. डोन्ट वरी फ़ॅऽर इट, अंकल !
Dec 8th
यह विषय पड़ा तो बहुत दिनों से था… पर वही सनातन रोना, कुछ असलियत का और कुछ फ़ैशन में, बोले तो.. समय का टोटा, वह तो आपके पास भी होगा ! ब्लागिंग और लिखने का विषय ? अरे, राम भजो… . जिस दिशा में भी नज़र डालो, विषय ललकार रहे हैं ! ब्लागर वही, जो बात पकड़ बतंगड़ बनाये ! टैग जो मन आये, वही घुसेड़ दो… संस्मरण, संवेदना, हलचल, विविध, व्यंग्य या कुछ भी ? अपुन के समीर भाई जी ने कहीं लिखेला है, ” ब्लागिंग की लत लग भर जाये, फिर तो सोते में, जागते हुये , रास्ते में, श्मशान में, लड़की में, कड़की में.. जित देखो ब्लाग सब्जेक्ट , जैसे मीरा के कान्हा ! उन्होंने तो अपना पक्का इंतज़ाम कर ही लिया है..लोकल आगे पढ़िये
सनद रहे कि यह नकल है..
Dec 7th
अब ढूँढ़िये, इसका मूल लेखक ? यदि आप जागरूक पाठक हैं, तो पहचान ही जायेंगे.. इस पोस्ट के मूल लेखक को… नहीं पहचाना ? कोई बात नहीं., फिर तो.. यह रचना मेरा हिन्दी के प्रसार में योगदान माना जाये और इस नक्काल के पोस्ट-मर्म को अनदेखा कर दें ओ पैणचो मंत्री लोकी की करदे ने, हुण पता लगिया । ओ पता तां पैलां ही सी, पर अद्दे जाके दिसदा पिया वे। ये वो संवाद थे जो मुंबई के किंग्स सर्कल से सटे पंजाबी कॉलोनी में एक दुकान पर चल रहे थे। तीन लोगों के ये हिंदी-पंजाबी मिश्रित संवाद इतने रोचक थे कि आगे पढ़िये
ऎ वतन के सज़ीले नौज़वानों…
Dec 5th
इन सजीले नौज़वान बहादुरों ( ? ) को देखिये.. देख कर चौंक गये, कि अपनी ज़ाँबाज़ मीडिया ने इनको कवर तक न किया.. क्या हमारा ज़ाँबाज़ मीडिया चुप बैठा है.? नहीं नहीं, वह बेचारे चुप नहीं, बल्कि दहशत फैलाने और कुर्सी दौड़ समीक्षा में डूबे हैं,इसलिये वह कर भी नहीं सकते !
क्या भारत सचमुच सँपेरों का देश है ? साँप के गुजर जाने पर लकीर पीटने की शालीन परंपरा से जीवंत एक सभ्यता.. कभी कभार साँप नेवले की गुत्थमगुत्था भी देखने को मिल जाती है, पर लकीर पीटने और साँप किधर से आया था, और दँश कितना गहरा है.. इससे फ़ुरसत मिले तो अगल बगल भी देखें ! आस्तीन के साँपों का कहना ही क्या , उनकी खामोश सुरसुराहट… आगे पढ़िये
कौन है यह, जाकिर-उर-रहमान उर्फ चाचा ?
Dec 2nd
अगर आप मुंबई पर हुए आतंकी हमले की तह में जाएं तो सरकारी एजंसियों द्वारा की गयी अंतहीन मनमानियां और लापरवाही सामने दिखाई देगी. मसलन, मार्च २००६ में अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की यात्रा के बाद अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन का एक आडियो संदेश जारी हुआ था जिसमें लादेन ने यहूदियों, ईसाईयों और हिन्दुओं को निशाना बनाने की बात कही थी. निर्देश दे रहे थे. उन्हें बार-बार फर्जी सौदेबाजी की भी सलाह दी जा रही थी. अब देखें कि आतंकी हमला हुआ कैसे और उसका टार्गेट क्या था? हमले की रात हमलावरों ने १३ स्थानों पर अंधाधुंध गोलीबारी आगे पढ़िये
ब्लागिंग विदाउट परपज़ !
Dec 1st
नेट पर बस इधर उधर टहल रहा हूँ । लोगों ने आनन फ़ानन मुंबई हादसे पर अपनी हाज़िरी लगा दी है । कुछेक जन तो बहुत ही गंभीर रहे हैं, कुछेक डाक्टर सेक्योरिटी को मारने पीटने के तेवर में दिखे । डाक्टर तो आपने ही चुना होगा । पर, मैं क्या लिखूँ, यह सोचता हुआ अपने इमेज़ एडीटर से खिलवाड़ कर रहा था, मन में चल विचारों को संयत भाषा में बाँधने की उठापटक चल रही है, सहसा कहीं छिपे किसी अदृश्य विचार ने यह इमेज़ बनवा दिया
कोई एकमत न हो पाने पर दूसरी एक और मीटिंग रखने का मौका हाथ में रहेगा दो मिनट के मौन में, आप शाम को घर ले जाने वाली शाक-भाजी का निर्णय तो… आगे पढ़िये



