Archive for September, 2008
रानी रूठेगी… अपना सुहाग लेगी
Sep 27th
बात तो भाई, एकदम्मै सही है. ! हाँ तो, शुरु किया जाय ? एक महीने का अंतराल होने को है.. और महीने में एक पोस्ट देने का वायदा भी है । मौका और मोहाल दोनों ही माक़ूल हैं सो, इस नामाक़ूल की कलम चले ? पहले यह तो पूछो, कि गायब ही क्यों था ? गायब होंय भूत प्रेत बैताल के दुश्मन, हम तो वइसे ही अपना नया शौक में उलझ गये थे । देखि लेयो ईहाँ, एच०टी०ऎम०एल० की एचटीमेंएल कर रहे थे, इस सइटिया का कोड सँवार बिगाड़ि रहे थे, अउर अब ख़ाज़ खुज़ाने आयें हैं, कोई ऎतराज़ ? मेरे काबिलतरीन दोस्त श्रीयुत दिनेश राय द्विवेदी जी, पहले ही फ़रमा भये हैं कि सबहिं फुलन्तरू हँईयन लौट के अईहें, भागि नाय सकत कोऊ, ईहाँ तै ? वइसे ऎसी… आगे पढ़िये
असली…. “ और भी काम हैं ज़माने में “
Sep 11th
लोगबाग यहाँ पूरी की पूरी पोस्ट साफ़ कर देते हैं, मैं तो केवल शीर्षक से गु़ज़ारा चला रहा हूँ। माफ़ करना समीर भाई, यह गुस्ताखी न करता लेकिन आपको यह शीर्षक एक ही दिन के लिये दिया था .. ब्याज़ के 21-22 टिप्पणियाँ आप रख लो, फिलहाल तो मैं यह शीर्षक उठाये लिये जा रहा हूँ, कल्लो जो करना हो । आप ढाई साल बड़े हो हमसे .. तो हमारे परिवार की परिपाटी अनुसार आपकी उतरन पर हमरा हक़ बनता है, आप कहोगे तो इसके बाद राजीव को दे दूँगा । नाराज़ हो गये ? ठीक है..खैर मैं भी नाराज हूँ, आपसे तो नहीं … पर, किस किस से नहीं हूँ, यह तो पूछि लेयो भ्राता ? जब हमरे शिवकुमार भईय्या श्रीयुत, दुर्योधन ( Last Name, Optional रहा… आगे पढ़िये
शब्दों की तलाश में निकली एक प्राणहीन पोस्ट
Sep 6th
कुछेक अहसास को आप शब्दों में बाँध नहीं सकते । लगता है, बहुत कुछ ऎसा ही अभी सारे देश और पूरे विश्व में देखा गया है । इसकी आप भर्त्सना कर लें, निंदा करें, बहसियायें, गरियायें.. फिर भी इस तरह के वतनी शर्मिन्दगी को लफ़्ज़ों मे कैद न कर पाने की छटपटाहट जस की तस बनी रहती है । किसी उपयुक्त शब्द को तलाशने आप कंदराओं में क्या जा पायेंगे, क्योंकि आपका तपोबल तो बलात्कार ( चलो भाई, मानसिक ही सही ) करते रहने और अपने साथ अनेक ( आर्थिक स्तर के ) बलात्कार होने देने में ही चुक गया है । ध्यान रहे, कि यहाँ मैं नैतिकता का कोई प्रश्न ही नहीं उठा रहा । मुझे उठाना भी न चाहिये, क्योंकि अनैतिकता की थाली में खाते रहने वाले कराह… आगे पढ़िये



