Archive for July, 2008
पर ऎसा भी क्या हो गया…कि ,
Jul 23rd
भटक कर आये हुये आलेख की दुम…..यहाँ जारी हैपर ऎसा भी क्या हो गया कि अनुपम को यह सब करना पड़ा ? एक प्रश्न और अनेक उत्तर होंगे । क्या यह क्षणिक आवेग मात्र था, शायद हाँ..और शायद नहीं भी ? आवेग के पक्ष में निश्चित ही अधिक वोट आयेंगे । पर एक बात साफ़ हो जाये…कि यह क्षणिक आवेग ही सही, किंतु यह तो मानेंगे कि उसकी पराकाष्ठा है, यानि किसी भी आवेग की । अपनी बात को कायम करवाने के लिये अपना ही जीवन ख़त्म करने का प्रयास केवल एक घटना नहीं, बल्कि व्यक्ति के मानस के साथ हुई कई दुर्घटनाओं को दर्शाता है । केवल इसी परिप्रेक्ष्य में देखें तो साफ है..  … आगे पढ़िये
शिव को कैसे मनाऊँ रे….शिव मानत नाहिं ऽ
Jul 21st
शिव को कैसे मनाऊँ रे शिव मानत नाहिं … शाल दुसाला शिव लेतो नाहीं है, बाघचर्म कहाँ पाऊँ रे शिव मानत नाहीं । मेवा मिठाई शिव भावत नाहीं है, भाँग धतूरा कहाँ पाऊँ रे शिव मानत नाहीं ….आह ! बचपन में सुनी हुई मिथिला-वैशाली के ’नचारी ’ लोकगीत की यह पंक्तियाँ आज भी कान में गूँजा करती हैं । भोले शिव.. औघड़ शिव… दानी शिव… आशुतोष शिव… क्रोधी शिव… महानुरागी शिव… नेपथ्य से श्रीराम की लीलाओं को संचालित करते शिव
हलाहल पान करते शिव.. प्रियतमा विरह से दग्ध तांडव करते शिव.. .. आह ! अनोखे हैं हमारे शिव – आज है श्रावण मास का प्रथम सोमवार.. पंडिताइन का व्रत.. मेरे जैसा औघढ़ पाकर कुपित होती है.. फिर भी क्यों छोड़े अपना शिव ? शिव पर इनका इतराना… आगे पढ़िये
ब्लागजगत में टिप्पणियों का भविष्य – एक सार्थक पेशकश
Jul 19th
इसका शीर्षक क्या हो सकता है , ?
Jul 5th
हेरा-फेरी ठोंकि के एकु पोस्टिया तौ लिया बनाय, पाठक आपहू बाँचि कै शीर्षक दियो बताय । दो दिन से वाकई निट्ठल्ले से माहौल से दो-चार हो रहा हूँ, वज़ह— अनवरत वर्षा ! बादल देख कर किसका मनमयूर न नाचता होगा, केवल हाइड्रोफोबिया का मरीज़ एक अपवाद है । लेकिन जब नाच नाच कर मनमयूर थक जाये, और भीगे पंख सुखाने को कोई ठौर न मिल न रहा हो, तो मनमयूर का सारा उल्लास हवा हो जाता है । दूसरे अपवाद फ़ुरसतिया गुरु दिख रहे हैं । बरसात पर बड़ी मस्त काव्य-पोस्ट ठोकी है । लेकिन हमारे जैसे दिहाड़ी पर मज़ूरी करने वाले से पूछो, महीने का पहला हफ़्ता…, पाँच – छः जन की सैलरी ( चलो, वेतन ही सही, आगे बढ़ें ? ) निकालनी है, ऎसे में… आगे पढ़िये
आओ , आज जरा डाक्टरों की खबर ली जाये !
Jul 1st
निबन्ध
ॐ
शीर्षक – डाक्टर दिवस
प्रस्तावना :- हमारा भारत एक महान देश है । भारत एक निराश कृषकप्रधान देश भी है । भारतवर्ष को एक दिवस-प्रधान देश भी कहा जा सकता है । हमारे देश में समारोहों की बहुतायत है । भारतवर्ष में नित नये नये दिवस और समारोह मनते देखे जा सकते हैं । उदाहरण के लिये:- स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, बाल दिवस, शिक्षक दिवस, हिंदी दिवस, सैनिक दिवस, यह दिवस-वह दिवस इत्यादि । इसी प्रकार भारतवर्ष में हर वर्ष एक जुलाई को डाक्टर-दिवस भी मनाया जाता है । यह दिन डाक्टरों के आदर्शों और नैतिकता आगे पढ़िये



