Archive for March, 2008
अमर मूँछ संग्रहालय
Mar 30th
पब्लिक इंटरनेट एक्सप्लोरर से एक नामालूम परहेज़ करती है, डा०द्विवेदी ने मित्रवत सलाह दी है, कि लोगों को फ़ायरफ़ाक्स ज़्यादा रास आता है और वहाँ फ़ोन्ट्स ठीक से न पढ़ पाने की वज़ह से लोग मेरे पोस्ट के टुकड़े टुकड़े करके… मुँह बिचकाये और चल दिये
मैंने तत्काल यानि फ़ौरन से पेश्तर फ़ायरफ़ाक्स ज़ी का आवाह्नन किया और स्थापित कर दिया, वाकई ज़नाब फ़ोन्ट्स में खड़बड़ाये घबड़ाये से लग रहे थे , IE 7 में आपकी दुआ से सब ठीकठाक है
मोज़िल्ला से मदद की गुहार की तो उन्होंने विस्ता अल्टिमेट में इसके बौरा जाने की पुष्टि की एवं फ़ायरफ़ाक्स बीटा 3.0? प्रयोग करके देखें, ऎसी पेशकश की एवं लाइवराइटर से बचने की सलाह दी । क्या सही है, यह तो मेरे को मालूम नहीं किंतु बीटा… आगे पढ़िये
फिर छिड़ी यार…बात ऽ ऽ मूँछों की ..ऽ …ऽ
Mar 29th
हुआ यह कि आज एक मेडिकल रिप्रेज़ेन्टेटिव महोदय तशरीफ़ लाये, मैं कुछ चटा हुआ बैठा था । प्रोफ़ेशनल काल यानि इस नामुराद पेशे की एक थैंकलेस कर्ट्सी ! अपराह्न के चार बज़े इनका समय होता है आगे पढ़िये
होली तो होय गयी ………तो ?
Mar 25th
मुला , किसी के जाने के बाद भी उसकी भीनी भीनी खुशबू साँसों में बसाये रखने में आपको एतराज़ हो तो हो, किंतु यह अपुन का बैटरी रिचार्ज का नुस्ख़ा है, जरा अपनी आँखें बन्द करके बर्षों पहले मिली किसी कन्या का ध्यान लगाओ ( बशर्ते कि वह आपकी बीबी न बन चुकी हो, दिमाग पर जोर दो । और भी कई होंगी… ख़्यालों में ! ) तो हम आज यहाँ 22 मार्च 2008 के कुछ तस्वीरें गुनगुना रहे हैं, चाहो तो आप भी तनिक झाँक लो ।
चलो, इसी बहाने .. ..
Mar 22nd
( आदरणीय बहनों एवं एकाध भाभियों , यह पोस्ट आप भी पढ़ सकती हैं । आज कोई ज़ेन्डर डिस्क्रिमिनेशन जैसी बात नहीं की जायेगी, और.. सुनिये ! आपलोग भी ज़ेन्डर कांशस न रहा करें । भगवान ने इतना कुछ दे दिया है, फिर भी पता नहीं क्यों, आप अपना असंतोष खुज़लाती ही रहती हैं ? आज के दिन..नहिं नहीं, आज शाम बाबा भी देवर का चार्ज़ लिये बैठे हैं , और आपलोग भी ना, आई.. उई करती हुई , बायें दायें छिपती छिपाती फिर रही हैं ! मैं कुछ करूँगा नहीं, सच्ची ! कसम खिलवा लो, कूच्छ बी नईं करूँगा … एक बार कह दिया ना, कि कुछ नहीं करूँगा, तो समझ लो कुछ नहीं करूँगा । अरे रुको तो, जाओ नहीं, मौका अच्छा है.. अगल बगल कोई है… आगे पढ़िये
जाके गंदे नाले में तू मुँह धोके आ
Mar 20th
जा जा रे….ऽ ..ऽ , जा रे जारे जा रे, जा रे कारे कागा का का का क्यों शोर मचाये काला रे जा रे जा रे अरे नाले में जाके तू मुँह धोके आ काला रे….ऽ ..ऽ , जा रे जारे ये गड़बड़ जी ओ गागा रे गा रे…ऽ ..ऽ , गा रे अईयो ये गालि दिया अईयो ये सुर बदला ओ जा रे जा रे ये सुर किधर है जी, ये सुर… ये…, एन्नाया इधु ओ जा रे जा रे…ऽ , ओ जा रे जा रे अम च्छोड़ेगा नहीं जी., .., .., .., .., अम पक्कड़के रखेगा जी
आज कंमेंटियाने की ज़िद ना करो…
Mar 15th
जात न पूछ साधो की
Mar 13th
" यह इंसान कहलाने वाले चोंचले उन तक ही रहने दे, यार ! "
अभी तो मेरी पोस्ट शुरु भी नहीं हुई और यह अनपढ़ बंदर कमेंटियाने लगे । शायद ज़ाहिल हैं इसीलिये इस ज़ाहिली पोस्ट पर बेवज़ह उछलने लगे। अरे भाई, पढ़े-लिखों की शालीनता इसी में रह्ती है कि चुप रहो और तेल देखो, तेल की धार देखो, बोलोगे तो लिखे पढ़े होने का भेद खुल जायेगा ।
बंद करो, यह बेतुकी बंदर पुराण, अपने मतलब पर आओ । वही तो ! फिर बता कर ही जाइये कि यह ब्लागर बिरादरी अपनी भारतीय वर्ण-व्यवस्था में किस वर्ग में रखा जायेगा ? हमको तो जन्म से यही… आगे पढ़िये



