Archive for February, 2008

केवल मस्केबाजों के लिये

मित्रों, मैं यानि कि अमर कुमार आपकी ज़रूरत और मज़बूरी समझता हूँ । पापी पेट के लिये, बाल-बच्चों के लिये, प्रमोशन के लिये और सच पूछो तो अपने अस्तित्व एवं अस्मिता के लिये मस्का अनिवार्य है । पता नहीं क्यों, मस्केबाजों को एक अलग नज़रिये से देखा जाता है ? आपसे ईर्ष्या करने वाले  अपनी  खीझ एवं  नाकामी के लिये मस्का न मारने का दम भले भर लें, वस्तुस्थिति इससे भिन्न है ! लीजिये ..  

गया ज़माना पोल्सन का ! अपना अमूल है ना, पूर्ण स्वदेशी एवं निहायत से निहायत देशी जनों के लिये !

देखा आपने… आगे पढ़िये

औरत .. .. .. मसालेदार !

दौड़ आये यहाँ तक , भला इससे ज़्यादा मसालेदार औरत कहीं और देखा है ?

तो अब इस फोटोब्लाग पर देख लेयो और कृतार्थ करो ! आपको कैसा लगा यह आइडिया ?… आगे पढ़िये

हमार वैलेन्टाइन उर्फ हमरी पंडिताइन

सच में हम बुढ़ाय रहें हैं, क्या ? दोस्तों की राय में मुझ सा ज़ँवादिल और गैर प्रोफ़ेशनल ठिठोलीबाज तो शायद प्रलुप्त प्रजाति में शुमार किये जाने लायक है । फिर हम कल भैलेन्टाईन डे कइसे भुलाय बइठे ?

                                        दरअसल हुआ यह कि आज अल्ल्सुबह भोर में रजाई में उनींदा सा गुनगुनाहट की मौज में लेटा लेटा बाहर सड़क पर से आती खटर-पटर पर मार्निंग वाक के उत्साहियों पर लानत भेज रहा था कि एक चिरपरिचित आवाज़ ने तंद्रा तोड़ दी , ” गुड मार्निंग सर, हैप्पी वैलेंटाइन डे ! “  यह कोई ‘ वह ‘ नहीं, बल्कि हमारी श्रीमतीजी ( निकनेम – पंडिताइन ) सामने चाय की प्याली के साथ नमूदार थीं, चमकती… आगे पढ़िये

य़े कैसा दीवानापन है….

या फिर दिवालियापन है ? मैं समझूँ .. ना समझूँ , तू समझ ले ज़रूर……. .. यह कैसा दिवालियापन है…ऽ…ऽ ?सच्चि मा हमरे इलेक्ट्रानिक मीडिया को ई हुई का गवा है ? चलत रहे चलत रहे 24 घंटे चलत रहे, ई चलावै की मज़बूरी कउनौ ब्रह्मा तो लिक्खिस नहिं न , तौ घड़ि दुई घड़ि रेस्ट ले लियो ! ई कचरा काहे पड़ोसत हो भाई , अँय ? हिंदुस्तान भरे मा हर घड़ि, हज़्ज़ारन मनई गुजर जात है , अउर सैकड़न बिरेकिंग नियूज़ मिलिहें , तनिक आपन नज़र तो दउड़ाओ ! अइसा ब्रेकिंग न्यूज़ दइ दिहो के, अब हमरी मेहरिया खानौ न बनाई अउर हम खाब का ? आगे पढ़िये