Archive for February, 2008
एक पोस्ट , अनमनी सी
Feb 28th
मेरा एक प्रिय गीत हुआ करता है, " दिल ढूँढ़ता है फिर कभी फ़ुरसत के रात दिन चार पल " आज वह दो चार पल हासिल भी हुये तो सोचा कुछ ब्लागियाया जाय । बहुत से विषय और संदर्भ मन में घुमड़ रहे हैं, यह ‘ ये डाक्टर…’ श्रृंखला भी अधूरी सी छूटी जा रही है । चलो आज फ़ाइनल हो जाय ।
आपको यह जान कर ताज्जुब होगा कि मेरा यह सड़िल्ला ‘ कुछ तो है…. ‘ चोरी हो गया है । मैं तो अब तक एक-एक टिप्पणी किसी तरह सहेजता रहा और यहाँ किसी भाई ने पूरी की पूरी ब्लगिया ही बटोर कर अपनी ज़ेब के हवाले कर लिया । जी हाँ , मेरा स्वामित्व बोले तो मालिकाना हक़ किसी कद्रदान ने हड़प लिया यानि Administrative Rights छिन… आगे पढ़िये
ये डाक्टर .. .. ..ये कैसे डाक्टर ?
Feb 24th
क्रम – छः * टीसते हृदय से सबका आभार
यह एक डाक्टर की सबसे बड़ी त्रासदी ही है उसका सम्पूर्ण कैरियर तनाव एवं आक्षेपों से आप्लावित रहता है । सामान्य जन उसको रहस्यमय शक्तियों से लैस मसीहा भले मानते हों , किंतु उसे अपनी तमाम व्यवसायिक अक्षमताओं एवं व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावज़ूद भी इस करिश्माई मिथ को जीवित रखना पड़ता है , Larger than Life !
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत् न त्वहं कामये राज्यं, न स्वर्गः न पुनर्भवम कामये दुःख तप्तानां, प्राणिनामार्तनाशनम May Everybody be happy May Everyone be free from illness May All of us see to it That nobody suffers from pain or sorrow I do not ask for a Crown Nor I wish to be in heaven or आगे पढ़िये
यह डाक्टर ?.. .. .. वाह रे डाक्टर !
Feb 22nd
क्रम – पाँच * अब जरा इनसे भी मिल लें
बात डाक्टरों की चल रही हो और इनसे न मिलवाऊँ जरा अनुचित लगता है । आख़िर ऎसे दिग्गज तो आप के पास पड़ोस में ही दिख जायेंगे । ज़रूरत आपके नज़र दौड़ाने की है । डाक्टर ही डाक्टर… एक बार मिल तो लें ! हर जाति, वर्ण और गोत्र के रोगों का शर्तिया एवं माक़ूल गारंटीशुदा इलाज़ यहाँ होता है ! निराश क्यों.. कमज़ोर क्यों रहते हो ? वगैरह !
सो इस श्रृंखला में इनका उल्लेख न करना इनके साथ, आप के… आगे पढ़िये
केवल मस्केबाजों के लिये
Feb 19th
मित्रों, मैं यानि कि अमर कुमार आपकी ज़रूरत और मज़बूरी समझता हूँ । पापी पेट के लिये, बाल-बच्चों के लिये, प्रमोशन के लिये और सच पूछो तो अपने अस्तित्व एवं अस्मिता के लिये मस्का अनिवार्य है । पता नहीं क्यों, मस्केबाजों को एक अलग नज़रिये से देखा जाता है ? आपसे ईर्ष्या करने वाले अपनी खीझ एवं नाकामी के लिये मस्का न मारने का दम भले भर लें, वस्तुस्थिति इससे भिन्न है ! लीजिये ..
गया ज़माना पोल्सन का ! अपना अमूल है ना, पूर्ण स्वदेशी एवं निहायत से निहायत देशी जनों के लिये !
देखा आपने… आगे पढ़िये
औरत .. .. .. मसालेदार !
Feb 19th
दौड़ आये यहाँ तक , भला इससे ज़्यादा मसालेदार औरत कहीं और देखा है ?
तो अब इस फोटोब्लाग पर देख लेयो और कृतार्थ करो ! आपको कैसा लगा यह आइडिया ?… आगे पढ़िये
हमार वैलेन्टाइन उर्फ हमरी पंडिताइन
Feb 15th
सच में हम बुढ़ाय रहें हैं, क्या ? दोस्तों की राय में मुझ सा ज़ँवादिल और गैर प्रोफ़ेशनल ठिठोलीबाज तो शायद प्रलुप्त प्रजाति में शुमार किये जाने लायक है । फिर हम कल भैलेन्टाईन डे कइसे भुलाय बइठे ?
दरअसल हुआ यह कि आज अल्ल्सुबह भोर में रजाई में उनींदा सा गुनगुनाहट की मौज में लेटा लेटा बाहर सड़क पर से आती खटर-पटर पर मार्निंग वाक के उत्साहियों पर लानत भेज रहा था कि एक चिरपरिचित आवाज़ ने तंद्रा तोड़ दी , ” गुड मार्निंग सर, हैप्पी वैलेंटाइन डे ! “ यह कोई ‘ वह ‘ नहीं, बल्कि हमारी श्रीमतीजी ( निकनेम – पंडिताइन ) सामने चाय की प्याली के साथ नमूदार थीं, चमकती… आगे पढ़िये
य़े कैसा दीवानापन है….
Feb 12th
या फिर दिवालियापन है ? मैं समझूँ .. ना समझूँ , तू समझ ले ज़रूर……. .. यह कैसा दिवालियापन है…ऽ…ऽ ?सच्चि मा हमरे इलेक्ट्रानिक मीडिया को ई हुई का गवा है ? चलत रहे चलत रहे 24 घंटे चलत रहे, ई चलावै की मज़बूरी कउनौ ब्रह्मा तो लिक्खिस नहिं न , तौ घड़ि दुई घड़ि रेस्ट ले लियो ! ई कचरा काहे पड़ोसत हो भाई , अँय ? हिंदुस्तान भरे मा हर घड़ि, हज़्ज़ारन मनई गुजर जात है , अउर सैकड़न बिरेकिंग नियूज़ मिलिहें , तनिक आपन नज़र तो दउड़ाओ ! अइसा ब्रेकिंग न्यूज़ दइ दिहो के, अब हमरी मेहरिया खानौ न बनाई अउर हम खाब का ? आगे पढ़िये



