Archive for September, 2007
गणपति बप्पा मोरया , …….तू ज़ल्दी आ
Sep 24th
इनसे मिलें, हमारे प्रथम पूज्य !!जरा गौर फ़रमायें, क्या फ़जीता किया है. इनकी दुर्गति देखते ही बनती है !कुछ अरसे पहले सुष्मिता बंध्योपाध्याय की पहली रचना आत्मकथात्मक रूप में आयी थी, मैनें भी पढ़ी,’ काबुलीवाले की बंगाली बीबी ‘. आपबीती का बड़ा सजीव वर्णन है. इसी उपन्यास में एक जगह उसकी देवरानी उससे किंचित आश्चर्य से पूछती है,”आखिर तुम लोगों की यह कौन सी इबादत है कि एक ग्लैमरस प्रतीक बना कर सिर आंखों पर बैठा लेते हो, तरह तरह के स्वांग रचा कर मूर्ति में ज़ान डाल देते हो ( तात्पर्य प्राणप्रतिष्ठा से है ), खूब हलुआ,मिठाई,लड्डू के थाल परोसते हो अपने लिये सुख सौभाग्य मांगते हो और फिर एक दिन ले जा कर… आगे पढ़िये
कुछ तो है..जो कि !
Sep 17th
कुछ भी जो तुमको झकझोरे, वह यहा पोस्ट करोमुझे स्वीकार होगा , आखिरकार यह सब तो चलता ही है !
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