भइया, कुछ तो है जो हमका अउर हमरे महान देश को चलाय रहा है,देशवा कै जवान होए के इन्तेजारै रहिगा, अउर हम “आओ बच्चो, तुम्हेदिखाए….”सुनत सुनत बुढाये गये अउर देशौ के सठियाये की डुगडुगी बज रही . बहुत तरक्की भा है भाई,एकदम राकेट ! बचकइया से सीधेसठकईया मा फाट परेन ! बिजली ससुर कै इन्तजारे रहिगा अउर परमाणुपरमाणु कै गाना बजै लाग !अच्छा छोडो, अखबार नीचे रख्खो .हमार दिमाग खराब न करौ, नेता जीके प्रदर्शन मे चले का है कि नही,१०० मनई हम्मै जिम्मै किहिन है.यु तो चलिबे करिहे ,चलन देओ .तो सच मे दोस्तो,यह शब्दचित्र एक चाय के होटल से आज ही उठाया है,आखिर कब तब चलता है,चलने दो का सिलसिला चलता रहेगा ?चलते..चलते, मै भी कहुगा ,कुछ तो है..जो कि यह देश चल रहा है, चलने दीजिये .कोउ आगे पढ़िये