बात बेबाक
© चुनरी में दाग…./ नया सँशोधित सँस्करण 2011
May 10th
खबर है, एक जिम्मेदार पुलिसतंत्र के ठीक नाक के नीचे एक गैरजिम्मेदार डाक्टर पूरी जिम्मेदारी से अनैतिक अंग प्रत्यारोपण का धंधा चला रहा था । भला कैसे भाई ? हमारी पुलिस तो इतनी सतर्क है कि वह चोरी – डकैती की योजना बनाते समय ही लोगों को गिरफ़्तार कर लेती है । अख़बार नहीं पढ़ते, आप ? कम से कम समाचारपत्रों में तो यही पढ़ने को मिलता है, ‘ तीन जुआरी रंगेहाथ जुआ खेलते पकड़े गये… गैरलाइसेंसी असलहे के साथ युवक बंदी.. चोरी की योजना बनाते हुये दो नक़बजन पुलिस ग़िरफ़्त में.. ! ’ अब एक महानगर की इतनी मुस्तैद पुलिस प्रशासन के एक पॉश हलके में डाक्टर साहब इतने टीमझाम के साथ कोई पाकेटमारी तो कर नहीं रहे थे ! बाकायदा तीन-चार अदद गुर्दे एक मानव आगे पढ़िये
प्रार्थनाओं के पँख पर सवार
May 1st
अरविन्द जी के विविधभारती ्पर बज रहा है…शर्म आती है मगर आज यह कहना होगा ! सो हम भी कहिये दे रहे रॅहे हैं । यह खुशदीप का मक्खन नहीं, मेरा ज़ेनुईन कैरेक्टर है.. कविरत्न भूलेलाल ’भुलक्क’ बड़ी मन्नतों के बाद मुद्दतों में एक कवि-सम्मेलन में न्योता मिला । समय कम था, फ़्लाईट से जाने का भौकाल ही कुछ और… बैठ लिये.. बोर्ड कर लिये भाई । जेब-वेब चेक किया टिकट-ऊकट है कि नहीं.. सब सलामत अपनी जगह पर मौज़ूद, इतमिनान की साँस लेकर पसर कर बैठ गये । प्रातः बेला थी, ईश्वर की असीम अनुकम्पा है, मुद्दतों बाद एक बुकिंग मिली है.. मगन होकर श्रीरामच्न्द्र कृपालु भज मन.. गुनगुनाने लगे । एकदम से जियरा धक्क… हाय रे हनुमान-चालीसा तो रखा नहीं.. क्या आगे पढ़िये
भूत के मुँह मॆं राम-नाम
Apr 26th
रामचन्द्र कह गये सिया से..ऎसा उलटयुग आयेगा,
सँत जपेंगे गाली-गुफ़्ता..और भूत रामनाम गायेगा
लो जी आप हँस दिये… निट्ठल्ले से अपनी वायदाखिलाफ़ी की माफ़ी माँग कर मैं यहाँ सीरियस ब्लॉगिंग करने आया, और…. और, आप हँस दिये ! हिन्दुस्तान तरक्की क्यों करे जब हमारे आप जैसे लोग ही हर मुद्दे में लोचा ढ़ूँढ़ने लगते हैं । दरअसल मैं ऎसी एक पोस्ट पहले भी लिख चुका हूँ, पर्यावरण पर, दोस्तों ने कहा कि अमाँ डॉक्टर… कहाँ लोट रहे हो, ज़मीन से उठ कर किताबी हकीकतों में आओ ! तभी से मैं सट्ट मार गया । दूजी बार ऎसी बदख्याली बीते अक्टूबर में आयी, जब लखनऊ मुरादावाद में
आगे पढ़ियेक़न्फ़्यूज़ियाई पोस्ट – हमका न देहौ, तऽ थरिया उल्टाइन देब
Sep 28th
ज़ाकिर भाई.. ओ ज़ाकिर भाई !
Aug 15th
ज़ाकिर भाई, आपकी पोस्ट देर से देख पाया । सटीक प्रश्न उठाया है, आपने । और मैं आपकी बेबाक दृष्टि का कायल भी हूँ । पहले तो मैं स्पष्ट कर दूँ कि, मैं आस्थावान सनातनी हिन्दू हूँ । बहुत सारे वितँडता और प्रत्यक्ष , अप्रत्यक्ष अनुभवों के बाद मैंने पूजा करना छोड़ दिया है । इस पर एक पोस्ट लिखने की इच्छा भी है, पर समय और विषयवस्तु में सँतुलन नहीं बन पा रहा है ।
आपकी पोस्ट में गायत्री मँत्र का जो अर्थ दिया है, वह वास्तव में इसका अनर्थ है । प्रचोदयात वैदिक सँस्कृत की धातु है, जिसका तात्पर्य " हमें अग्रसर करें.. हमें… आगे पढ़िये
पता नहीं क्यों ?
Jul 21st
लगता है, आजकल मैं निष्क्रीय हूँ… पूरी तौर पर तो नहीं, कम ब कम ब्लागर पर निष्क्रीय तो हूँ ही.. पता नहीं क्यों ? इस पता नहीं क्यों का ज़वाब तलब करियेगा, तो टके भाव वह भी यही होगा कि, ” पता नहीं क्यों ? “ यह पता नहीं क्यों हमेशा एक नामालूम सी कशिश भी लिये रहता है, लगता है कि कहीं कोई जड़ता मुझे जकड़ रही है, जकड़ती जा रही है.. पर आप हैं कि, अपने पर हज़ार लानतें भेजते हुये भी, खामोशी से इस निष्क्रियता को समर्पित रहते हैं, पता नहीं क्यों ? मुआ पता नहीं क्यों न हुआ कि इब्तिदा ए इश्क हो गया । है न अनुराग ?
नँगे सच में नहायी बहना
May 26th
देख भाया, मेरी गलती नहीं हैं । आजकल हाल है कि, ’ जाते थे जापान .. पहुँच गये चीन समझ लेना ’ तो पढ़ा ही होगा । अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल एक मिन्नी सी, सौम्य.. लजायी हुई पोस्ट देकर अपने जीवित होने की गवाही देनी पड़ी । बताइये भला.. मेरी एक चिरसँचित इच्छा पूरी हुई, दादा विनायक सेन रिहा हुये, और मैं ब्लागर होकर भी अपनी खुशी की चीख-पुकार खुल कर न मचा सका । बिजली की आवाज़ाही, अफ़सरों का विदाई और स्वागत समारोह एटसेट्रा करीने से एक पोस्ट भी न लिखने दे रहा है !कुश जी, अब तुम न कह देना, कि पहले ही कौन सा करीने से लिखा करते थे । मुझे यूँ छेड़ा ना करो, मैं ठहरा रिटायर्ड नम्बर !
भूमिका… आगे पढ़िये



