सर जी, देखिये फोटो ठीक आयी है ? मेरा सिर मरीज पर झुका हुआ है, मैं हाथ उठा कर रुकने का इशारा करता हूँ । फिर दोहराया जाता है, ” सर जी, देखिये फोटो ठीक आयी है ? ” यह आलोक हैं.. आलोक त्रिपाठी ! सामने आलोक जी खड़े हैं, मेरे सामने अपने नये मोबाइल सेट का स्क्रीन लहराते हुये.. उसमें है मेरी तस्वीर ! नोकिया 6500 या ऎसा ही कुछ.. शोरूम में अकेले जाने से घबड़ा रहे थे । आलोक.. मेरा Liaison Representative को आप लोग क्या कहवे करें हैं, मैं नहीं जानता.. मैं तो इन्हें गडबड़झाला प्रतिनिधि कहता हूँ, क्लिनिक और लैब का मल्टीपरपॅस पुर्जा ! और किसी कि हिम्मत न होती, पर यह पितृहीन बालक मेरे स्नेह और सानिध्य में कुछ अधिक लड़ैता हो गया है..” सर जी, देखिये फोटो ठीक आयी है ? पहली फोटो आपकी ही खींची है । कल शाम यह मोबाइल मैंने ही पसँद किया था.. मॉडल नहीं-किया 6300 ( अँग्रेज़ी नेम नोकिया 6300 या ऎसा ही कुछ…यह आप नोकिया इँडिया से जानें ) और यह मोबाइल इनको कल शाम ही दिलायी है !

SirJi मेरे चैम्बर में जब मैं मरीज़ में मशगूल होता हूँ, मुझे कोई दखलअँदाज़ी पसँद ( बल्कि बर्दाश्त ) नहीं है.. यहाँ पर पँडिताइन का भी दखल नहीं चलता । मैंनें देखा मुँह बाये हुये श्रीमान सामने खड़े हैं, पहली फोटो मेरी लेकर मुझे कृतार्थ करने की शाबासी दक्षिणा चाह रहे हैं, पँडित जी ! मुझे तिलमिलाहट तो ऎसी हो रही थी कि वह दक्षिणा पाकर गाल सहलाते हुये घर जायें, पर मैं सँभल गया ।
अधीनस्थ कर्मचारी या कनिष्ठों को सार्वजनिक रूप से डाँटना मेरी सोच के अनुसार अनुचित है ( बशर्ते कि वह मुझे इसके लिये बाध्य ही न कर रहा हो ), लिहाज़ा चुप रह जाना पड़ा । यह आपसी विश्वास को कमजोर करती है, साथ ही यह मरीज़ या दर्शक को आपके धूमिल अनुशासन का सँदेश देती है ।
किन्तु उसके उत्साह का पारावार न था,” सर जी इसे आप अपने इन्टरनेट पर लगा दीजियेगा,” वह पुनः अपना मोबाइल मेरे चेहरे पर चमकाने लगा । ’बड़ा बेहूदा लड़का है, यह तो…’ यह भुनभुनाते हुये मैं मोबाइल उसके हाथ से झपट लिया । मेरी आग्नेय दृष्टि ने समझिये कि मामला फौरी तौर पर रफ़ा-दफ़ा कर दिया ।

फोटोग्राफ़ी के मेरे शौक ने स्वयँ मुझे मॉडल बनने के अवसरों से वँचित ही रखा, गोया मैं कैमरे के पीछे मौज़ूद हुआ करता था । मन में उतावलापन जागा, देखें जरा… कैसी फोटो आयी है… पिछले एक वर्ष में शायद यह पहली फोटो हो । हा तात, फोटो तो अच्छी आयी थी, एकदम नेचुरल.. न बनाव-सिंगार, न पोज़-एँगल, रोज के पहनने के कपड़े… ( क्लिनिक में यह कपड़े ? इस विषय पर अब अपना गीत क्या गाऊँ, कभी बता दूँगा ) मन थोड़ा शान्त हुआ,” सही है यार ! कभी इसे किसी पोस्ट में सटा / लगा दूँगा ।

जैसा होता आया है, भले लोगों के कार्य निर्विघ्न कहाँ हो पाते हैं ? मेरा ही निट्ठल्ला चरित्र कोंचने लगा,” देयो देयो.. एक हफ़्ते में ही ’कुछ तो’ को दूसरी पोस्ट दे रहे हो, और उधर ? अब तुम सफ़ेदपोशी पर शान्ति-सँदेश ठेलोगे, सादगी पर अगर हाथ आ गयी तो उधार की कोई कविता-उविता भी ज़रूर पेलोगे, कनिष्ठों के सम्मान पर कुछ शब्द वमन करोगे और अनुशासन को शत-शत नमन करोगे… करो, करो !

मैं सन्न रह गया, ’हाय राम, यह निट्ठल्ला ब्लॉगरों के यह आम ढोंग कैसे जानता है, ज़रूर रातों में छुप छुप कर ब्लॉग-श्लॉग पढ़ने लग पड़ा होगा । मैंनें झिड़क दिया, ” चुप बे, मैं, इस आलेख को इस प्रकार से फोटो लिये जाने के पहले अनुमति लिये जाने के सामान्य शिष्टाचार की ओर ले जाने वाला हूं ।” निठ्ठल्ला चहक उठा, दिखा दिया न सफेदपोशों वाला पैतरा…. बात बदलने में गिरगिट, मुझको मायने मतलब न समझाओ । यह कहो कि ब्लॉगर पर ज्ञान की गँगा बहाने निकले हो.. ( चिढ़ाने के अँदाज़ में ), डाल लो बेटा, अपने डॉटाबेस में तुम भी ज्ञान का कुछ प्रकाश डाल ही लो !

सच में बड़ा ज़ाहिल है, सो मैं ढ़ीला पड़ता हूं, वरना यह तो श्मशान तक पीछा करते हुए लड़ने वाला जीव है । अतः कुछ आजिजी से बोला, “जानते नहीं कि मोबाइल कैमरे का सबसे अधिक दुरूपयोग भारत और फिलीपीन्स में होता है ?” हे राम, बड़ा कलही है, मेरा यह चरित्र… इसे बस कोई बहाना चाहिये… सो ऐंठ कर कहता है, “फिलीपीन्स तक भागे चले जा रहे हो यहां अपने अधोभाग में अवस्थित तोंद पर निगाह नहीं जा रही है डाक्टर साहब ।” यदि आपने यह कहावत सुनी है….. जाट रे जाट तेरे सिर पर खाट, तेली रे तेली तेरे सिर पर कोल्हू…. तो आपको अटपटा नहीं लगेगा क्योंकि, यह वही मसल हुई ! बात कहां से उठायी और इसने आख़िर में लाकर मेरी तोंद पर पटक दी, अब विश्वास हो गया, ज़रूर यह रातों में छुप छुप कर ब्लॉग-श्लॉग पढ़ने लग पड़ा होगा । उसने जैसे मेरे मन की बात पढ़ ली, ” यह भी ब्लागिंग की देन है बेटा, कुर्सी तोड़ो और तोंद बटोरो।

चुप, असाहित्यिक एलिमेन्ट ! साहित्य रचने में यह स्वतः आ जाता है । यह है तभी आपकी पूछ है, फुरसतिया को देख, समीर भाई, गुरू ज्ञानदत्त जी, सतीश सक्सेना, भाई अरविन्द मिसिर जी, पँडित दिनेश राय द्विवेदी ( एन्टीसिपेटरी सॉरी सर ! ) अपने कुश को देख, और तो और स्वयं भाई शिव कुमार मिश्र जी भी तोंदग्रसित हैं (, डा. अनुराग का नहीं जानता वह क्योंकि वह अभी तक अपनी शादी के ग्रुप फोटो की कटिंग से ही अब तक काम चला रहे हैं । )

पूरा कटहा है क्या….. कटकटा कर बोला तो इसे कम करो, इस तोंद जनित वायु विकार की वजह से ही ब्लागिंग में इतनी अस्वस्थता फैल रही है । ( देखा न, आखिर इसने मुझे मूल विषय से भटका ही दिया ) इधर जनाबे अली अपनी रौ में चालू थे, इसी तोंद की वजह से तुम्हारी हिन्दी ब्लागिंग अलसाई रहती है, अगर रोज थके मांदे दस लाइन की पोस्ट ठेल भी दिया तो कौन सा एहसान कर दिया ? तुम अपने को रहस्यवादी, छायावादी इत्यादि कहला कर इतराते हो, कारण कि तुम स्वयँ ही अपनी तोंद कुरते में छिपाते हो । तुम ही लोग ब्लागिंग में संकीर्णता लाते हो, पेट जितना बड़ा, दिमान उतना ही छोटा होता जाता है । अब मुझे मजा आने लगा तोंद का रूपक तो मजेदार है । बोल ले बेटा मैं पोस्ट में आज इसी को चेप दूंगा । दिमाग की सोचने की जहमत न करनी पड़ेगी । यह सोचता हुआ मैं हंस पड़ा । उसने पुनः मुझे पढ़ लिया, ” देखा.. पोस्ट लिखने के नाम पर अपना दिमाग खर्च न होने की सँभावना से कितने खुश हो रहे हो । अरे.. दिमागीन खाया कर, न मिले तो दूसरे का दिमाग चाटा कर, दिमागी करत न सही पर दिमाग तो खुला रख, स्वच्छ हवा आने दे । तेरे तोंद का वायु विकार, वैचारिक विकार बन कर ब्लागिंग को गठिया ग्रस्त कर रही है !

मैंनें मौज ले ली, आँख मार कर बोला जो आज्ञा मेरे टनकू पिया ! वह बिफर गया । आँय बाँय शाँय बकने लगा कि अपनी उपरोक्त फोटो दिखाने के बहाने मैं अपनी तोंद का आतंक फैलाना चाहता हूं, भूल जाऊँ अपनी तोंद की अकड़ । इसमें आकार है तो क्या, ताकत नहीं है । हमने उससे पीछा छुड़ाया, अच्छा श्रीमन.. आपकी ब्लागिंग में तोंद पर शोध से मैं प्रसन्न हुआ । इसे तत्काल हटाता हूँ, इन्टरनेट से हटा तो नहीं सकता.. टिवटर पर तो यह समायेगा नहीं । ब्लागर की तोंद का मामला है, कब टूल पकड़ ले, कोई भरोसा नहीं सो फेसबुक पर इसका एक प्रोफाइल बना लेता हूं । तोंद श्री वहीं उलझे रहेंगे, और एक नया प्रयोगवाद रहेगा । देखा आपने, निट्ठल्ले ( निट्ठल्लों ) की करतूत… खामख्वाह के तोंद जनित झमेले में मूल विषय फोटो के लिए अनुमति से आलेख भटक गया। रात गयी बात गयी । main-aisa-kyon-hoon2

अब लीजिये, शरदपवार भये अमर कुमार : यहाँ कुछ यही बानगी है, आज मैंने स्वयं से अनुमति लेकर, अपने वेवकैम से अपना ही फोटो अपने हाथों खींचा है । जिसमें कुछ कलाकारी करने का असफल प्रयास भी शामिल है । अस्थायी रूप से मेरा थोबड़ा बिगड़ गया तो क्या, मैं गर्व से यह तो पूछ ही सकता हूं । सर जी, फोटो ठीक आयी है ?