रुकावट के लिये खेद है…
तकनीकी खराबियों के कारण
- रुकावट के लिये खेद है !
हम शीघ्र ही हाज़िर होंगे,
विशेष रिपोर्ट एवं विवरण के साथ
एक शीतयुद्ध जारी है, ऊँट के करवट बदलने की प्रतीक्षा करें
डॉ. अमर कुमार
इस ब्लॉग के टाइमखोटीकार...डॉ. अमर कुमार, जन्म मिथिला में, बचपन वैशाली में, प्रारँभिक शिक्षा कोसी क्षेत्र से, माध्यमिक शिक्षा एवँ जीवन से मुठभेड़ का प्रारँभ बैसवारा ( रायबरेली ) से, चिकित्सा स्नातक कानपुर मेडिकल कॉलेज़, सँप्रति निज चिकित्सा व्यवसाय व शौकिया लेखन रायबरेली में ही ! अभिरुचि : लालित्य से रिश्ता रखने वाले हर क्षेत्र में टाँग अड़ाना, अतार्किक परपँराओं को तोड़ना, हर प्रकार का पठन ( भाषा का बँधन नहीं ) आम मान्यताओं के अनुसार खिसकेला कोटि का ब्लॉगर ( 'चलने दीजिये.. क्या कीजियेगा' जैसे लोगों के हिसाब से यदि गलत को गलत कहना गलत है, तो.... )
| प्रिंट करें | आलेख टैमखोटीकार डॉ. अमर कुमार को December 15, 2007 समय 1:07 pm, वर्गीकरण वर्गविहीन. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |
कोई ट्रैकबैक नहीं.
अमारा मौसी का बेटी
about 2 years ago - 12 टिप्पणियाँ
स्पीच का बात को पिरेस वाला इतना मच मच मचायेला कि मामला सीरियस हो रैली है, मैडम का वास्ते ! झप्पी बोले तो.. झप्पी ! अक्खा इंडिया में देखो.. पिरेस में गँदा लोग भरेला है, बाप ! तू जा के मैडम को सारी बोल दे , सरकिट !
सरकिट गोल ? अमर सिंग अपुन को इच सरकिट बना डाला.. अपना पालिटिक्स में !
माफ़ी माँग ले, सँजू बाबा ! … आगे पढ़िये
ऎई , आज फिर निट्ठल्ले पर हो क्या ?
about 2 years ago - 6 टिप्पणियाँ
शिवभाई का मेसेज़ आया.. यदि मैंनें कुछ लिखा नहीं, तो वह कवितायें लिख लिख कर ब्लागजगत में तबाही मचा देंगे ! सो, मैं सनद्ध हुआ, कि यह यंत्रणा मेरे को ही झेल लेने दो, भाई ! नीलक्ण्ठ बन जा ब्लागर अमर कुमार ! कविता ही तो लिखना है.. कुछ लिख मार, लोगों के समझने के फेर का मौका उठा ले ! बड़े मौके हैं, पोयट्री फ़ील्ड में .. किसी को धता बता दो.. आप नहीं समझ सकते , मेरी कवियायें ! यह लोकधर्मी है.. प्रयोगधर्मी है.. या अधर्मी है.. इनके बीच की एक बारीक रेखा आपके.. ना ना आपके बस की नहीं है, आपके बस की नहीं है, भाई साहब ! लीजिये !
एक समय हिन्दी साहित्य में दाढ़ीवादी युग आया था ! चिकने… आगे पढ़िये
एक शाम अपने कुकूर जी के नाम
about 2 years ago - 14 टिप्पणियाँ
आज शाम मैं अपना कुत्ता चराने निकला.. वह मुझे रोज ही शाम को घुमाने ले जाता है ! कोई चारा न देख मैं बेचारा टिगीड़ टिगीड़ चाल से उसको फ़ालो करता रहता हूँ ! इस दौरान मन ही मन कई पोस्ट लिख चुका होता हूँ, लौटते समय टिप्पणियाँ समेटते समेटते घर के पास वाले नुक्कड़ पर ढेर सारा धन्यवाद उड़ेंलना जैसे नियम हो.. यह निजी बातें हैं, आपको क्या ?
आज एक ज्ञानोदय होता भया । इस ज्ञान का उदय तो नित्य ही होता रहा होगा, बट आई कुडन्ट नोटिस ! माहौल का बहुत ही फ़र्क पड़ता होगा न ? क्योंकि आज इस ज्ञानोदय की किरणें बरबस ही दिमाग में प्रविष्ट कर गयीं ! मुझको ज्ञान मिला, इससे आपको क्या… आगे पढ़िये
मेरे राहत का सबब है, मेरा पाकिस्तान
about 2 years ago - 13 टिप्पणियाँ
कोई इसे ग़द्दारी न समझ लेना, मेरे ख़ातिर तो राहत का सबब है, मेरा पाकिस्तान ! यह सरज़मीं मानो ज़न्नत की सिफ़त रखता, जो कहलाता है पाकिस्तान ! कितनी ग़लतफ़हमियाँ बनी रहतीं जो मैं कभी न जा पाता अपने पाकिस्तान !
मेरे हालिया पाकिस्तान यात्रा की तस्वीरें यहाँ देखें, और बतायें कि पाकिस्तान कितनी बड़ी ज़रूरत है, सच्ची..नो किडिंग !
यहाँ क्लिक
करके देखिये… आगे पढ़िये
यह आख़िरी बार बताता, तुमकूँ
about 2 years ago - 8 टिप्पणियाँ
वनगमन से लौट आने की व्यथाकथा जारी रहेगी, इससे पहले वहाँ मिला एक महत्वपूर्ण स्कूप बता देना राष्ट्रहित में है ! इसलिये आमोद प्रमोद की इस दुनिया में ’ देशहित ’ का एक ब्रेक लेने की अनुमति चाहूँगा ! अईयो साईं आला रे आला ने बहुसंख्यक राष्ट्रीय पशुवत जनता को दूसरे पायदान पर और अल्पसंख्यक होते जाते राष्ट्रीय पशु बाघ की प्राथमिकता को ऊपर क्या रख दिया.. फर्रोसै देश में मज़ाकिया एस. एम. एस. का सैलाब आया हुआ है ! हरदम जलते रहेंगे, मुये !
वन में आनन फ़ानन देश को बरबाद करने में माहिर निट्ठल्लों के दस्ते ज़ोश में आ गये है ! आ गये तो आ गये, आप?
वही तो ? मैं यूँ ही निट्ठल्ला बैठा… आगे पढ़िये
अनूप जी लताड़े गये – बिहार की जनता को राहत
about 2 years ago - 17 टिप्पणियाँ
आम तौर पर पोस्ट लिखने बाद इनको टिप्पणी देखने गिनने की ज़रूरत नहीं पड़ती ( या कहिये कि इतनी फ़्लाप पोस्टों के बाद शर्म और डर से न जाते होगे ! ) कल रात की पोस्ट प्रकाशित होने में नेटवर्क बहुत दोस्ताने तरीके व्यवहार नहीं कर रहा था ! कारण जो भी हो, यहाँ बताना उचित न होगा, कि ऎसा किन्हीं पहुँचे हुये स्वनामधन्य ब्लागर की ब्राडबैन्ड वालों के मध्य रसूख़ के चलते हुआ है ! संजो कर सुबह प्रकाशित करने का मन बनाया..सोने चला गया !
सुबह इसको प्रकाशित करने गया तो, देखा कि पोस्ट प्रकाशित हो चुकी है ! यह कैसे हुआ ? यह चिट्ठाचर्चा के लिये एक नये विवाद का माल है ! शायद सर्वर एरर की वज़ह से तीन टिप्पणियाँ भी भटक आयीं थी ।… आगे पढ़िये
डा. अनुराग के बचपन पर कराह उठा यह पचपन
about 2 years ago - 17 टिप्पणियाँ
जैसे जैसे डा. अनुराग की पिछली ज़बरदस्त पोस्ट को बाँचता जाता, दिल से.. हमारे वाले दिल से, कराह उठ रही थी, “हाय अमर तुम न हुये ।” ऎ भाई कोई यहीं खुन्नुस न निकाल लेना, कि “ अगर होते तो, क्या उखाड़ लेते ?” एकदम सच बात है, मैं क्या कर लेता.. ?
मैं बचपन में ही चुगद था, और विद्वान टिप्पणीकारों के मत में, सो तो अब तक हूँ । अब यह शब्द इतना सहज लगता है.. कि फ़ौरन ही हर ऎसे टिप्पणीकार की पारखी निगाहों का फ़ालोअर बन जाता हूँ । मेरे बाबा कोई चीज बरबाद होते हुये देख कहते.." सकल वस्तु संग्रह करहूँ आवैहिं एकु दिन काम, समय पड़े पर ना मिले माटिहूँ खरचे दाम । " सो अपना अमूल्य ( दो कौड़ी से
तुम पार नेट परमेश्वर तुम ही नेट पिता
about 3 years ago - 28 टिप्पणियाँ
ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे फ़्रस्ट (एटेड ) जनों के संकट, त्रस्त जनों के संकट एक क्लिक में दूर करे ॐ जय गूगल हरे… जो ध्यावै सो पावै दूर होवै शंका, स्वामी दूर होवै शंका सब इन्फ़ो घर आवै, सब इन्फ़ो घर आवै कष्ट मिटै मन का ॐ जय गूगल हरे… नेट पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं किसकी तुम बिन और न दूजा, तेरे बिन और न दूजा होप करूं किसकी ॐ जय गूगल हरे… तुम पूरन हो खोजक तुम वेबसाइटयामी, स्वामी तुम वेबसाइटयामी पार नेट परमेश्वर, पार नेट परमेश्वर तुम सबके स्वामी ॐ जय गूगल हरे… तुम ब्लागर. के फ़ादर तुम ही इक सर्चा, स्वामी तुम ही इक
इतना विशाल देश.. क्या अकेले मेरे बस में ?
about 3 years ago - 15 टिप्पणियाँ
हरतरफ़ चर्चा है, कि देश मुसीबत में हैं, आतंकी इसे रौंद रहे हैं, घोटाले इसे लील रहे हैं ! सत्यम भी आख़िरकार असत्यम साबित हो रहा है । अब, भला आप ही बताइये, मैं अकेला क्या कर सकता हूँ ? कल जोड़ने बैठा तो .. देश की आबादी निकली : 100 करोड़ जिसमें 9 करोड़ तो सेवानिवृत हैं, जिनसे शायद ही कोई उम्मीद हो
वो अन्डरस्टैंडिंग थी और ये सियासत है !
about 3 years ago - 12 टिप्पणियाँ
स्थान: सीमा चौकी, इस बार उत्तर-पश्चिम क्षेत्र बात बात पर उबल पड़ने और भारत माँ की सौगंध लेने की आदत के चलते रामनिहारी जाटव अपने बटालियन में रामबवाली भारती पुकारे जाते थे ! हमारे चरित्रनायक रामबवाली जी अब लांसनायक भारती के नाम से पुकारे जाने लगे हैं । दीपावली मनाने दो वर्ष बाद छुट्टियों में घर आये हैं । सब ठीक ठाक गुज़र रहा था, मात्र चार दिन ही रह गये थे, कि बेस से वारंट आगया.. … रिपोर्ट इमिडीयेटली ! बीबी ने उनका सामान बाँधा, उन्होंनें कुलदेवी के सम्मुख सिर पर क़फ़न बाँधा और चल पड़े लाम पर ! रिपोर्टिंग की औपचारिकतायें पूरी हुईं, एक संक्षिप्त मीटिंग… और यह तय पाया गया कि जिसको जिस क्षेत्र की अधिक जानकारी है,उन्हें वहीं भेजा जाय ! आज लगभग दस दिनों बाद… आगे पढ़िये




about 4 years ago
चलो ऊंट कौन करवट बदलता है – तभी पता चलेगा।
about 4 years ago
हम इंतज़ार करेंगे…कयामत तक के तू आए…