इतना विशाल देश.. क्या अकेले मेरे बस में ?
हरतरफ़ चर्चा है, कि देश मुसीबत में हैं, आतंकी इसे रौंद रहे हैं, घोटाले इसे लील रहे हैं ! सत्यम भी आख़िरकार असत्यम साबित हो रहा है । अब, भला आप ही बताइये, मैं अकेला क्या कर सकता हूँ ? कल जोड़ने बैठा तो .. देश की आबादी निकली : 100 करोड़
जिसमें 9 करोड़ तो सेवानिवृत हैं, जिनसे शायद ही कोई उम्मीद हो
18 करोड़ तो बेचारे अभी स्कूलों में ही हैं, इनसे क्या होना है ?
इन 8 करोड़ दुधमुँहों को, जो अभी 5 वर्ष भी पार नहीं कर पायें हैं..तो अलग ही रखिये !
यह 15 करोड़ बेरोज़ग़ार अपनी ही चिन्ता में हैं…
देश के लिये… बाद में देखा जायेगा !
और यह 1.2 करोड़ बीमार तो अस्पतालों में कभी भी देखे जा सकते हैं, आतंकवादी इन्हें भले न बख़्शें, पर यह बेचारे अभी कुछ करने लायक ही नहीं हैं , सो इनको तो आप फ़िलहाल बख़्श ही दो !
जरा जोड़िये तो… कितने हुये ? 98 करोड़.. ठीक !
अब…हमरी न मानों,तो दिनेशराय द्विवेदी जी से पूछो,
पिछले माह तक 79,99,998 विचाराधीन या सज़ायाफ़्ता ज़ेलों में थे !
बचे केवल दो व्यक्ति.. यानि कि आप और हम !
आप तो इस समय मेरी पोस्ट पर टिप्पणी करने जा रहे हो, और… मैं ?
मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि, चल के आपकी पोस्ट पर टिप्पणी चुकता करूँ
या देश की चिन्ता करूँ ? यही तो रोना है.. कि, इतना विशाल देश.. क्या अकेले मेरे बस में है ?
| प्रिंट करें | आलेख टैमखोटीकार डॉ. अमर कुमार को January 12, 2009 समय 11:03 pm, वर्गीकरण वर्गविहीन. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |

आजकल अपुन के मेल बाक्स में कोल्ड-ड्रिंक की लूट मची है ! मेरे ढाँचें का डाक्टरी वाला टेम्पलेट अँग्रेज़ी से भले बना हो, पर कंटेन्ट तो देसी रहेगा ! जैसे दूल्हे राजा का कितना भी ऋँगार कर देयो, उनका बाबू राजा बनाय के जयमाल के लिये ऊँची कुर्सी पर बईठाय देयो ! चारों तरफ़ फ़ोकस ही… 


about 3 years ago
ओह!! कितना बोझ आन पड़ा है आपके नाजुक से कंधो पर. काश, मैं टिप्पणी न कर रहा होता तो आपका बोझ जरुर बंटाने चला आता मगर आप तो मेरी मजबूरी समझ रहे हो.
about 3 years ago
आप क्यूँ इतना परेशान हैं, अजदक भाई कह गये हैं कि देश सही जा रहा है ।http://azdak.blogspot.com/2008/03/blog-post_18.html
about 3 years ago
सच में हम और आप दोनों इस देश का गुरुतर भार अपने कंधों पर उठाये हुये हैं
about 3 years ago
… और मेरी तो जुकाम से बुरी हालत है सो बचे अकेले आप.डाकसाब, सभालना जरा, एईसा..:)
about 3 years ago
बड़ा हिसाब किताब करना पड़ा होगा आपको. कम से कम आप तो देश की चिन्ता करते रहिये – निठल्ले कहीं के.
about 3 years ago
अभी वे सत्रह करोड़ बाकी हैं जो 100 करोड़ के आंकड़े के बाद पैदा हुए हैं।
about 3 years ago
च्च ..च्च ..हमेँ भी अब भारी चिँता होने लगी है बाबू अमर मोशाय
पर इत्ते काम मेँ भी आप टीप्पणी करेँगेँ (हमारे जाल घर पर) तो बडी खुशी होगी -अग्रिम धन्यवाद ,-लावण्या
about 3 years ago
भैय्या यह तो वही बैलगाडी के नीचे चलते कुत्ते की सोच हो गई. क्षमा हमने आपको संबोधित नहीं किया. इस पोस्ट को बनने में काफ़ी परिश्रम करना पड़ा होगा इसीलिये सुंदर भी बन पड़ा है. आभार.
about 3 years ago
sir apki math achi hai. acha laga.
about 3 years ago
लाहोल विला कूवत.. अब क्या देश भी हम चलाएँगे??? तौबा तौबाइस काम के लिए तो भगवान अपायंट किए गये है.. उन्ही के भरोसे देश चलता रहेगा.. आइए आप और हम एक दूसरे के ब्लॉग पर टीपियाए…
about 3 years ago
अच्छा हिसाब -किताब कर रक्खा है ।
about 3 years ago
सबकुछ ठीक हो जायेगा. थोड़ा धीरज धरें. कंधे उचक दीजिये.
about 3 years ago
इ कौन कम्बखत देश की चिंता कर रहा है……….कौन है बगावत करने वाला …….सामने पेश किया जाये
about 3 years ago
सचमुच बेबस हैं हम आप और सभी !
about 3 years ago
<><>@ Neeraj Rohilla ji <> अब इसके लिये तो सुपर अज़दकीय भेजा चाहिये होगा, न ?<>@ समीर भाई <> अच्छा तो 51 बहानों के प्रयोग की शुरुआत हो गयी ?<>@ मैथिली भाई <> भाई, अक्खा कंट्री को ज़ुकाम होयेला है, नाक कान बंद दिमाग ठस्स ! अपुन बरोबर बोला न, भाई ? <>@ हिमांशु <> और.. देश की चिन्ता् निट्ठल्ले तो करवे करें हैं, हिमांशु जी ! दालरोटी वाले पिस रहे हैं !<>@ दिनेशराय जी <> बाकी सत्रह करोड़ का डाटा आडिटर झनरल के दफ़्तर से आना प्रतीक्षित है !<>@ Prabhat Goyal<> छोड़ो यार, मैथ अच्छी होती.. तो ब्लाग लिख रहा होता, अबतक कई घोटाले करके ऎश छन रही होती !<>@ P.N.Subramaniam Ji <> आपका अनौपचारिक संबोधन.. मेरा सौभाग्य ! मैं इसीमें विश्वास रखता हूँ !<>@ भाई कुश <> सच है, हम रामभरोसेस्थान में ही निवास कर रहे हैं !<>@ ममता <> ज़ह-ए-किस्मत !<>@ लावण्या दीदी <> ऎई रकोम बोलून ना दीदी, आमि सोब सोमय शुधु टीप दिच्छी, आपनी के !<>@ शिवभाई <> ओह, ये कंधे तो दबे हुये हैं.. थोड़ा हाथ लगाकर आप ही उचकाने में मदद करो न, शिवभाई ?<>