हरतरफ़ चर्चा है, कि देश मुसीबत में हैं, आतंकी इसे रौंद रहे हैं, घोटाले इसे लील रहे हैं ! सत्यम भी आख़िरकार असत्यम साबित हो रहा है ।  अब, भला आप ही बताइये, मैं अकेला क्या कर सकता हूँ ?  कल जोड़ने बैठा तो .. देश की आबादी निकली : 100 करोड़
जिसमें 9 करोड़ तो सेवानिवृत हैं, जिनसे शायद ही कोई उम्मीद हो
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e2285 नौकरीपेशा वर्ग में केन्द्रीय कर्मचारी ठहरे 17 करोड़ और राज्य कर्मचारी हैं 30 करोड़
इनमें शायद ही कोई काम करता हो ?
और.. हमारे यहाँ हैं 1 करोड़ आई० टी० प्रोफ़ेशनल !ATT00002 
इनमें अपने देश के लिये कौन काम करता है, जी ?

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18 करोड़ तो बेचारे अभी स्कूलों में ही हैं, इनसे क्या होना है ?
 happy_feet इन 8 करोड़ दुधमुँहों को, जो अभी 5 वर्ष भी पार नहीं कर पायें हैं..तो अलग ही रखिये !
यह 15 करोड़ बेरोज़ग़ार अपनी ही चिन्ता में हैं… ATT00005 देश के लिये…  बाद में देखा जायेगा !
ATT00006 और यह 1.2  करोड़ बीमार तो अस्पतालों में कभी  भी  देखे जा सकते हैं, आतंकवादी इन्हें भले न बख़्शें, पर यह बेचारे अभी कुछ करने लायक ही नहीं हैं , सो इनको तो आप फ़िलहाल बख़्श ही दो !
जरा जोड़िये तो… कितने हुये ?  98 करोड़.. ठीक !
अब…हमरी न मानों,तो दिनेशराय द्विवेदी जी से पूछो, funny-animated-gif-004                                                                                      पिछले माह तक 79,99,998  विचाराधीन या सज़ायाफ़्ता ज़ेलों में थे !
बचे केवल दो व्यक्ति.. यानि कि आप और हम !
आप तो इस समय मेरी पोस्ट पर टिप्पणी करने जा रहे हो, और… मैं ? mail (2)
मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि,  चल के आपकी पोस्ट पर टिप्पणी चुकता करूँ avatar247_0                
या देश की चिन्ता करूँ ? यही तो रोना है.. कि, इतना विशाल देश.. क्या अकेले मेरे बस में है ?