बाबा.. बाबा…बाबा.. अरे अब बस भी करो, बाबा !
सोचा था कि योगागुरु रामदेव यादव पर कुछ न लिखूँगा… चहुँ ओर बाबा का शोर, उफ़ ! तथाकथित बाबा को लेकर पूरे ब्लॉगजगत सहित, हमारा प्रगतिशील जुगाली समाज दो घड़ों में बँट गया है… यदि बाबा पर मैं कुछ लिख देता तो कितनी गालियाँ सुननी पड़तीं, कि खुद रामदेव भी शर्मा जाते । धनदौलत के अलावा यही सम्मोहित चेले-चपाटे तो उनकी पूँजी हैं, जिन्हें मिथ्या मान कर वह कभी भी त्याग सकते हैं । जान रहेगी तो हिन्दुस्तान में चेलों की कमी थोड़े ही है… बताइये भला सबकुछ सेट था..
विदेशी कम्पनी के बने हवाई ज़हाज से स्वदेशी बाबा उतरे.. देखा मँत्रीगण उनकी अगवानी में नाच रहे थे.. बाबा मुदित होते भये.. अगले दिन के न्यौते पर उन्होंने खुल्ले में मिलने से तो इँकार कर दिया, पर चुपके से होटल के कमरे में जा थिरके । सरकार को मज़ा नहीं आया.. सो आधीरात में उन्हें नचाना शुरु किया.. लेकिन बाबा तैयार नहीं थे , सो वह ड्रेस-अप होकर भाग लिये… अपनी माँद में पहुँच कर घोषणा की , जब तक है जाँ.. जाने ए जहाँ मैं नाचूँगा । पर यहाँ भी वीरु की बसँती उनसे जीत गयी । बाबा हार कर नींबू पानी माँग गये…… ओह, लगता है कि मेरे न चाहते हुये भी मेरा कीबोर्ड बाबा की ओर बहक रहा है… जरा लगाम लगाओ रे टाइमखोटीकार !
कल एक गैर-बाबाई अच्छी पोस्ट पढ़ी.. मन खुश हुआ । रात में अखबार चबाने बैठा तो बाबा….. पत्रिका उलटायी तो बाबा, ब्लॉग पढ़ना चाहा.. तो बाबा ! मेरा दिल ही कराह उठा, " बाबा.. बाबा…बाबा.. अरे अब बस भी करो, बाबा !
आखिर मैंने ऎसा क्या पढ़ लिया…
अनशन कर, अभी मत कर, कभी मत कर
सब अनशन करते है। गांधी जी ने भी किया था, इसलिए मैं भी करूंगा।
बाबा ने कहा-मैं अनशन करूंगा। सरकार ने हाल-चाल जाना, कुशन-क्षेम पूछा-क्यों क्या हुआ ? बाबा ने कहा- काला धन वापस लाने के लिए अनशन करूंगा । सरकार ने आश्वस्त किया- अरे हम ले आएंगे न आप क्यों अनशन करेंगे । छोड़िए । बाबा ने कहा- सभी महान लोग अनशन करते हैं । गांधी जी ने तो कितनी ही बार अनशन किया था । मैं भी करूंगा । प्रधानमंत्री ने चिटठी लिखकर आग्रह किया- मत कीजिए । बाबा ने मचलते हुए कहा- अन्ना ने भी तो अनशन किया था । मैं भी करूंगा । मंत्रियों ने हाजिर होकर कहा- मत कीजिए । लेकिन बाबा ने कहा- अनशन की तैयारियां पूरी हो चुकी है, मंच सज गया है । अब तो मैं अनशन जरूर करूँगा । संघ-भाजपावालों ने ताली बजायी- शाबाश डटे रहिये । अन्ना ने भी कहा । सो बाबा ने अनशन कर दिया । उन्होंने लोगों से कहा- आओ हम सब अनशन करें । सरकार परेशान । पुलिए भेजी । मारा-पीटा, हटाया, दौड़ाया और भगा दिया।
बाबा ने कहा दिल्ली में नही तो मैं हरिद्वार में अनशन करूंगा । अनशन जारी रहा । बाबा का बोलना भी जारी रहा । सेना बनाने की ललकार लगायी । अभी इस ललकार की निंदा-आलोचना हो ही रही थी कि दुहाई दी जाने लगी-बाबा का स्वास्थ्य गिर रहा है । सरकार उनका अनशन खत्म कराए । सरकार ने ध्यान नहीं दिया । बाबा ने कहा कोई बात नहीं मैं नींबू पानी और ‘शह्द ले लेता हूँ, पर अनशन जारी रखूंगा । पेशेवर मध्यस्थों ने सरकार से कहा – आप कहें तो हम मध्यस्थता करें । सरकार ने ध्यान नहीं दिया । राज्य की ने चिंतित हो बाबा को उठाया और अस्पताल में भर्ती करा दिया । डाक्टरों ने कहा- पानी चढ़ाया जा रहा है।
सरकार का काम अनशन खत्म कराना, सरकार यह काम न करे, तो समस्या तो पैदा होगी ही !
सरकार ने अनशन खत्म करने के लिए नहीं कहा । सो चिंता बढ़ने लगी । दुहाइयां दी जाने लगी अरे, कोई तो उनका अनशन खत्म कराओ । भक्तों ने दुहाई दी । विपक्ष ने कहा । साधु-संतों और बाबाओं ने भी कहा । सबने कहा- कोई तो उनका अनशन खत्म कराओ । जिनको कहना चाहिए था, लग रहा था कि वे तो बिल्कुल भी नहीं कहेंगे कि अनशन खत्म कर दों सो बाबाओ ने कहा- लो अनशन खत्म करा । पर ये कतई नहीं कहा कि ऐसा अनशन फिर कभी मत करना कि खुद करो और खुद ही तोड़ों ।
साभार – सहीराम, नश्तर 17.6.2011
बाबा का रूप
काले धन और भ्रष्टाचार के मुददे पर योग गुरू बाबा रामदेव रामलीला मैदान में सत्याग्रह कर रहे थे । पर सत्याग्रह खत्म कराने गई पुलिस देखकर बाबा रामदेव अपने हजारों समर्थकों को उनके हाल पर छोड़ मंच से कूदकर भाग निकले और महिला समर्थकों के बीच जा छिपे । इतना ही नहीं, किसी महिला के कपड़े पहनकर और दुपटटे में मुंह छिपाकर उन्होंने भागने की कोशिश की । लोगों को योग द्वारा निर्भीक व ‘शक्तिशाली बनने की शिक्षा देने वाले बाबा का यह रूप् देखकर बड़ी मायूसी हुई उनके इस आचरण से योग की भी तौहीन हुई है । बाबा को इसके लिए पश्चाताप व आत्ममंथन करते हुए राजनीति को अलविदा कर देना चाहिए, क्योंकि उनका हश्र तो कुछ यों हुआ है कि बड़ा ‘शोर सुनते थे पहलू में दिल का, चीरा तो कतरा ए खूँ भी ना निकला ।
आभार आसिफ़ खान ( पाठकों के पत्र ) दैनिक हिन्दुस्तान 17.6.2011 के मेल बॉक्स में
सबसे महंगे ब्रॉण्ड का राजनीतिक पराभव
बाबा रामदेव का अनशन अंततः खत्म हो गया, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा । उनकी ‘शारीरिक अवस्था लगातार खराब होती गई । इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा की बजाय अंग्रेजी चिकित्सा के प्रति आम लोगों की आस्था गहरी होगी । धन्य है बाबा, जो अनशन तोड़ने अपने अस्पताल नहीं गये । उनका इलाज करने वाले डाक्टर एलोपैथी के है । क्या आयरनी है आयुर्वेद के महारथी के अनशन की ? हम तो यही जाहते थे कि बाबा रामदेव और उनके भक्त तब तक क्रमिक अनशन करते, जब कि सारा काला धन विदेश से वापस नही आ जाता । लेकिन अफसोस की बात है, वे ऐसा नहीं कर पाए । इधर जो बाबा रामदेव नाटक चल रहा है, उस पर चकबस्त का शेर है- मिटेगा दीन भी और आबरू भी जाएगी । तुम्हारे नाम से दुनिया को शर्म आयेगी ।
बाबा रामदेव ने अनशन के दौरान ग्लूकोज का इस्तेमाल क्या आमरण अनशन के नियमों का पालन है ? बाबा ने कोई आयुर्वेदिक पेय पदार्थ क्यों नहीं लिया । क्या ग्लूकोज आयुर्वेदिक है ? बाबा रामदेव ने अपना अनशन तोड़ा । श्री श्री रविशंकर आदि संतो के कहने से तोड़ा । इस पर दाग का ‘शेर है- खातिर से या लिहाज से मैं मान तो गया । झूठी कसम से आपका ईमान तो गया । बाबा और उनकी समृद्धियों का संसार जिस गति से बढ़ा है, उस गति से मेहनत से इतना पैसा नहीं कमाया जा सकता । इसे गोरख धंधे की आय कहेंगे या हवाला का पैसा या पुण्य की लक्ष्मी ? इस पर साकिब का ‘शेर है- चमन न देख नशेमन को देख ए बुलबुल । बहार में ही कभी आग भी बरसती है ।
बाबा रामदेव टाइप लोगों पर जोश मलीहाबादी का शेर है- "जो डरकर नारेदोजख़ से ख़ुदा का नाम लेते हैं । इबादत क्या वोह खाली बुजदिलाना एक खिदमत है ।। " आगे एक अन्य शेर में जोश मलाहाबादी ने लिखा है- "इबादत करते हैं जो लोग जन्नत की तमन्नामें । इबादत तो नहीं है, इक तरह की वोह ‘तिजारत’ है ।।"
पण्डित ब्रजनारायण ‘चकबस्त’बड़े शायर थे, हमारे फेसबुक के अनेक दोस्त और बाबा रामदेव हिन्दुत्ववादी राष्ट्रवादी हैं,राष्ट्रवाद ज़हर है । ‘चकबस्त’ ने राष्ट्रवाद से देशप्रेम को अलगाते हुए लिखा- " फ़िदा वतनपै जो हो,आदमी दिलेर है वोह । जो यह नहीं तो फ़क़त हड्डियों का ढ़ेर है वोह ।।
ब्लॉग नया ज़माना से साभार -जगदीश्वर चतुर्वेदी
देखा आपने, मैंनें वायदे के मुताबिक बाबा पर कुछ न लिखा । ![]()
| प्रिंट करें | आलेख टैमखोटीकार डॉ. अमर कुमार को June 19, 2011 समय 12:02 am, वर्गीकरण ताकि सनद रहे .., व्यँग्य. Follow any responses to this post through RSS 2.0. You can leave a response or trackback from your own site. |




about 8 months ago
आपकी तरह बाबा रामदेव यादव ने भी अब तय कर लिया है, नहीं बोलेंगे…
खास तौर पर मीडिया के सामने तो बिल्कुल नहीं…श्री श्री रविशंकर और मोरारी बापू की सलाह है उन्हें…कहा है…जो करना है चुपचाप करो…मी़डिया से चहचहाते रहोगे तो अपने चमकते धंधों से भी हाथ धो बैठोगे…
वैसे ये बात काबिले-गौर है…कैंसर जैसे असाध्य रोग के इलाज का दावा करने वाला बाबा चार दिन के अनशन में ही एलोपेथी की शरण में पहुंच गया…
जय हिंद…
about 8 months ago
बाबा चले थे महात्मा बनने,बाबा भी नहीं बने रह सके…पुरानी कहावत है,’चौबे चले थे छब्बे बनने’ !

राजनीति यदि हमें कुछ देती है तो सब कुछ ले भी लेती है..यही सीख मिलती है इस ‘प्रहसन’ से !
about 8 months ago
अब तो हमें भी कहना पड़ेगा अब और नहीं बस और नहीं ..
about 8 months ago
ना ना करते बाबा पर लिख बैठे

लिखना था कुछ और बाबा लिख बैठे
about 8 months ago
वाकई आपने तो वादा निभाया कुछ नहीं लिखा बाबा पर.वर्ना हम भी कहते बस बाबा बस

about 8 months ago
नहीं भी लिखते तो भी सेकुलरता का सर्टिफिकेट तो आपके नाम था ही |
about 8 months ago
आपकी तरफ़ से ऐसे लेख की उम्मीद थी ही।
about 8 months ago
बाबा के खिलाफ आपका अनशन भी बढ़िया रहा।
about 8 months ago
आपका ब्लॉग काफी अच्चा है और तकनीकी रूप से अद्वंसद है.
about 7 months ago
ये आपने अच्छा ही किया कि बाबा पर कुछ नहीं लिखा .बहुत बहुत आभार .
about 7 months ago
डॉ साहब इस ब्लॉग पर फोलो की ऑप्शन क्यों नहीं है ?
क्या इ मेल द्वारा ही संभव है ?
about 7 months ago
न न करते लेख तुम्ही पर लिख बैठे .
about 6 months ago
सही लिखा मेरे दोस्त
about 5 months ago
जहाँ गए हैं वहाँ टिप्पणी पढ़ने की सुविधा है क्या? आप जाने वाले पहले हिन्दी ब्लॉगर हैं. विचित्र सा लग रहा है.
घुघूती बासूती