अरविन्द जी के विविधभारती ्पर बज रहा है…शर्म आती है मगर आज यह कहना होगा ! सो हम भी कहिये दे रहे रॅहे हैं । यह खुशदीप का मक्खन नहीं, मेरा ज़ेनुईन कैरेक्टर है.. कविरत्न भूलेलाल ’भुलक्क’ बड़ी मन्नतों के बाद मुद्दतों में एक कवि-सम्मेलन में न्योता मिला । समय कम था, फ़्लाईट से जाने का भौकाल ही कुछ और… बैठ लिये.. बोर्ड कर लिये भाई । जेब-वेब चेक किया टिकट-ऊकट है कि नहीं.. सब सलामत अपनी जगह पर मौज़ूद, इतमिनान की साँस लेकर पसर कर बैठ गये । प्रातः बेला थी, ईश्वर की असीम अनुकम्पा है, मुद्दतों बाद एक बुकिंग मिली है.. मगन होकर श्रीरामच्न्द्र कृपालु भज मन.. गुनगुनाने लगे । एकदम से जियरा धक्क… हाय रे हनुमान-चालीसा तो रखा नहीं.. क्या करें । चलो ठीक है.. भगवान भरोसे… !
anokha pilot

इतने में ज़हाज़ जी एकदम से हरकतुल जहाज हो गये , और शायद उड़ान भरने को दौड़ने लगे, पर यह क्या रनवे के छोर पर जाकर ठिठक गये । लेकिन नहीं…. रुके नहीं ऊ एकदम्मै यू-टर्न लीहिन और वापस टैक्सिंइँग गेट पर जाकर हुड़हुड़ाते हुये सुस्ताने लगे । दस मिनट पन्नरह मिलट, आधा घँटा.. जब एक घँटा होने को आया तो भूलेलाल जी अधीर हो उठे.. सूखे कँठ से रिरियाये बहिन जी, ” ई जहजवा कब चलेगा मतलब कब उड़ेगा.. कोनो खराबी उराबी हुआ है का ? “

कन्याश्री अपने को बहिन जी कहे जाने से आहत होती हुई, तमतमा गयीं.. चुप बैठिये श्रीमान.. इँजिन का कोई बोल्ट ढीला है.. खड़खड़-खड़खड़ कर रहा है, ! उसी के आवाज़ से डिस्टर्ब होकर पाइलट साहेब सुरक्षा कारण का बहाना बना कर जहजवा लौटा लायें हैं.. अब उसका व्यवस्था बनने दीजिये, जहाज भी उड़ेगा.. अउर उसमें आप भी उड़ेंगे । डेढ़ घँटा बाद जहाज पुनः हरकतुल जहाज होते भये.. अबकी ले सटाका पहली ही दौड़ान में देखिये न ऊ आसमान में..

कन्याश्री कोल्ड-ड्रिंक लेकर आयीं, भूलेलाल आतुर हो उठे, “बहिन जी इँजिन का बोल्टवा बदला गया, “ देवि अप्रसन्न भाव से बोलीं लीजिये, लीजिये पकड़िये अपना कोल्ड ड्रिंक.. एकुरेट बोल्टवा नहीं मिलने से जहाज नहीं उड़ेगा का, हम पाइलटवे बदल दिये ई वाला तनिका ऊँचा सुनता है सो बोल्टवे का आवाज़े नहीं न सुनेगा बेफ़ालतू कोनो लभड़ सभड़ नहीं करेगा..लीजिये जल्दी धरिये न अपना कोल्ड ड्रिंक.. ! bhoole laal kaa plane

सच में उनको इसकी ज़रूरत थी अरविन्द जी के रेडियो का विविधभारतिया ठीके कह रहा था.. शर्म आती है मगर आज यह कहना होगा …. भक्तों को हनुमानचालीसा ज़ेब में लेकर उड़ना होगा
शायद इसी लिये श्री मारुतिनँदन का अविष्कार आज से हजारों वर्ष पहले हमारे मनीषियों ने कर लिया था क्योंकि वह जानते थे कि एक दिन ऎसा आयेगा, ….कि उनकी ड्यूटी हमारी हवाई सेवा की सुरक्षा में भी काम आयेगी ! तभीये न रामचन्द्र कह गये सिया से ……. कौव्वा मोती खायेगा । नोट दो.. लाइसेन्स लो.. उड़ाने का लाइसेन्स । सबको थोक में उड़ाने का लाइसेन्स !