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    एक अस्वीकृत रचना

    रोहित ने लिफाफा ला कर दिया । क्या है कहते-कहते मैं खोल कर देखता हूं । एक साथ नत्थी चार पन्ने हैं, सबसे उपर वाले पन्ने पर उपर लिखा हुआ है - अस्वीकृत रचना... उसके इर्द गिर्द बटा, घन के गणितीय निशान सहित कुछेक अंक बिखरे पड़े हैं । नीचे महीन हस्तलिपि में लिखा हुआ है अस्वी./वापस ... एक स्लिप भी लगी हुई है, महोदय हमें खेद है कि हम आपकी कहानी न छाप सकेंगे । विशेषाँक के लिये कथानक में वासँतिक ग्लैमर वाँछित है । कृपया भविष्...
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    गुमशुदा मेलों की तलाश में

    ऎसा नहीं है कि, मुर्गा बाँग न दे तो सवेरा ही न हो ! होगा, अवश्य होगा और होता ही रहा है । तो फिर, दिन को मुर्गे की बाँग से जोड़ने का सबब ? मनुष्य को अपनी जागृतावधि तय करने लिये शायद एक डिमार्केशन लाइन की ज़रूरत महसूस हुई होगी, इस प्रारँभ-बिन्दु पर उसने मुर्गे के उद्घोष को पकड़ लिया । भले ही अब तक सभ्यतायें उसे हलाल करती आयी हैं, पर मुर्गा अपने मार्ग से कभी न हटा । जैसे उसने इसे अपने कर्तव्य से ही जोड़ लिया हो, इससे बेपरवा...
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    सर जी, फोटो अच्छी आयी है ?

    सर जी, देखिये फोटो ठीक आयी है ? मेरा सिर मरीज पर झुका हुआ है, मैं हाथ उठा कर रुकने का इशारा करता हूँ । फिर दोहराया जाता है, " सर जी, देखिये फोटो ठीक आयी है ? " यह आलोक हैं.. आलोक त्रिपाठी ! सामने आलोक जी खड़े हैं, मेरे सामने अपने नये मोबाइल सेट का स्क्रीन लहराते हुये.. उसमें है मेरी तस्वीर ! नोकिया 6500 या ऎसा ही कुछ.. शोरूम में अकेले जाने से घबड़ा रहे थे । आलोक.. मेरा Liaison Representative को आप लोग क्या कहवे करें है...
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  • वावा एक सलवार शूट

    बाबा.. बाबा...बाबा.. अरे अब बस भी करो, बाबा !...

    सोचा था कि योगागुरु रामदेव यादव पर कुछ न लिखूँगा... चहुँ ओर बाबा का शोर, उफ़ ! तथाकथित बाबा को लेकर पूरे ब्लॉगजगत सहित, हमारा प्रगतिशील जुगाली समाज दो घड़ों में बँट गया है... यदि बाबा पर मैं कुछ लिख देता तो कितनी गालियाँ सुननी पड़तीं, कि खुद रामदेव भी शर्मा जाते । धनदौलत के अलावा यही सम्मोहित चेले-चपाटे तो उनकी पूँजी हैं, जिन्हें मिथ्या मान कर वह कभी भी त्याग सकते हैं । जान रहेगी तो हिन्दुस्तान में चेलों की कमी थोड़े ही ...
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  • anokha pilot

    प्रार्थनाओं के पँख पर सवार

    अरविन्द जी के विविधभारती ्पर बज रहा है...शर्म आती है मगर आज यह कहना होगा ! सो हम भी कहिये दे रहे रॅहे हैं । यह खुशदीप का मक्खन नहीं, मेरा ज़ेनुईन कैरेक्टर है.. कविरत्न भूलेलाल ’भुलक्क’ बड़ी मन्नतों के बाद मुद्दतों में एक कवि-सम्मेलन में न्योता मिला । समय कम था, फ़्लाईट से जाने का भौकाल ही कुछ और... बैठ लिये.. बोर्ड कर लिये भाई । जेब-वेब चेक किया टिकट-ऊकट है कि नहीं.. सब सलामत अपनी जगह पर मौज़ूद, इतमिनान की साँस लेकर...
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वावा एक सलवार शूट

बाबा.. बाबा…बाबा.. अरे अब बस भी करो, बाबा !

Jun 19th

टाइमखोटीकार डॉ. अमर कुमार वर्ग ताकि सनद रहे ..

14 टिप्पणियाँ

सोचा था कि योगागुरु रामदेव यादव पर कुछ न लिखूँगा… चहुँ ओर बाबा का शोर, उफ़ ! तथाकथित बाबा को लेकर पूरे ब्लॉगजगत सहित, हमारा प्रगतिशील जुगाली समाज दो घड़ों में बँट गया है… यदि बाबा पर मैं कुछ लिख देता तो कितनी गालियाँ सुननी पड़तीं, कि खुद रामदेव भी शर्मा जाते । धनदौलत के अलावा यही सम्मोहित चेले-चपाटे तो उनकी पूँजी हैं, जिन्हें मिथ्या मान कर वह कभी भी त्याग सकते हैं । जान रहेगी तो हिन्दुस्तान में चेलों की कमी थोड़े ही है… बताइये भला सबकुछ सेट था.. आगे पढ़िये

अनशन, अन्ना, आयुर्वेदिक चिकित्सा, काला धन, टाइमखोटीकार, रामदेव
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पीरन के पीर…. भये जुलहे कबीर

Jun 15th

टाइमखोटीकार डॉ. अमर कुमार वर्ग विशेष

11 टिप्पणियाँ

जनवरी-फरवरी 2008 से ड्राफ्टिया मोड में पड़े इस आलेख का आज अहिल्या-उद्धार हो रहा है.. शीर्षक था पीरन के पीर भये जुलहे  कबीर ! पोस्टो के तत्कालीन रुझान को देखते हुये कबीर साहब नेपथ्य में हो लिये । क्योंकि तब मुझसे टिप्पणियों में पूछा जाने लगा था कि आप काहे डॉक्टर हैं । मन में पलता अपराधबोध आज शमित होने को है, दर्ज़ा सात में पाठ्यपुस्तक में कबीर को पढ़ा और वह मन को भा गये… वाह, क्या बेबाकी का ग्लैमर था… काँकर पाथर जोड़ि के मसजिद लियो बनाय… पाथर पूजैं हरि मिलैं ता मैं पूजूँ पहाड़ । तब तक किसी को इस तरह डपटते न सुना, न देखा, न पढ़ा था । दुबारा वह हाई स्कूल के कोर्स में अवतरित हुये… फिर क्या था मैं… आगे पढ़िये

अमर कुमार, कंकड पाथर जोड क़े, कबीर जयन्ती, पाथर पूजैं हरि मिलैं
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एक अस्वीकृत रचना

Jun 12th

टाइमखोटीकार डॉ. अमर कुमार वर्ग अकहानी

20 टिप्पणियाँ

रोहित ने लिफाफा ला कर दिया । क्या है कहते-कहते मैं खोल कर देखता हूं । एक साथ नत्थी चार पन्ने हैं, सबसे उपर वाले पन्ने पर उपर लिखा हुआ है – अस्वीकृत रचना… उसके इर्द गिर्द बटा, घन के गणितीय निशान सहित कुछेक अंक बिखरे पड़े हैं । नीचे महीन हस्तलिपि में लिखा हुआ है अस्वी./वापस … एक स्लिप भी लगी हुई है, महोदय हमें खेद है कि हम आपकी कहानी न छाप सकेंगे । विशेषाँक के लिये कथानक में वासँतिक ग्लैमर वाँछित है । कृपया भविष्य में भी हमें  इसी प्रकार अनुगृहीत करते रहें… भवदीय इत्यादि इत्यादि उस स्लिप पर एक लाइन से कहानी/लेख/संस्मरण/वृत्तांत/कविता/रूबाइयां/निबन्ध/लघुकथा/ अन्य ललित  इत्यादि सजे  हुए थे जिसमें… आगे पढ़िये

12 जून बाल श्रम निषेध दिवस, one more stanley, Prevent child labour
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सेवा में श्री सतीश पँचम, द्वारा blog-post_24.html, सफ़ेदघर, मुम्बई

May 27th

टाइमखोटीकार डॉ. अमर कुमार वर्ग कभी कभी मेरे दिल में...

10 टिप्पणियाँ

दो दिन पहले भाई सतीश पँचम जी का आलेख पढ़ा, वास्तव में कमज़ोर हूँ या समझिये अपनी मानवीय कमज़ोरियों के चलते मॉडरेशन की तलवार देख अक्सरहाँ आगे बढ़ लेता हूँ.. ऎसे विषयों पर जहाँ सँवाद-परिसँवादों का त्वरित आदान प्रदान सँभव न हो, मन उदिघ्न हो जाता है । उनके आलेख की सच्चाई से सहमत होते हुये भी कुछ न कह पाने की मन में मलिनता  व्याप्त थी । अस्तु प्रेषित है यह बिलम्बित टिप्पणी…. सच है, स्टीफन हॉकिंग के विचारों को उनके वैज्ञानिक भ्रम का अपरिपक्व दर्शन कहा जा सकता है । अपनी शारीरिक हालत को विज्ञान की वैसाखियों पर टिका कर वह अपने अँदर के डर को मार रहे हैं । ईश्वर के अस्तित्व को ललकारना उनके कुँठा के आवेग को दर्शाता है.. यदि हालत… आगे पढ़िये

Stephen_Hawking, आन्सटीन, ईश्वर, नासदीय सूक्त, प्रो. ए.पी.जे. कलाम, स्टीफन हॉकिंग
petrol-petrol-yeh-din

अलविदा दोस्तों !

May 16th

टाइमखोटीकार डॉ. अमर कुमार वर्ग बेतक़ल्लुफ़

37 टिप्पणियाँ

आज लिखने को मत कहना …. होश उड़े हुये हैं, आँखें थकी हुई हैं, दिलबुझा पड़ा है…. जायें तो जायें कहाँ । बड़ा अच्छा रि्टर्न – गिफ़्ट दिया है…शातिर तूने । हमने तुमको जिताया , बदले में तुमने हमको मूताया । तुम्हें ममता की छाँव दिलायी.. तो तुमने  पीछे से जूता टिकाया । गज़्ज़ब है, भाई गज़्ज़ब है !

इसी हफ़्ते भारतीय मुग़ालता आयोग ( पढ़ें योजना आयोग ) की रिपोर्ट पढ़ के सकते में था… कि, उन्होंनें सीधा आँकड़ा बैठा दिया कि यदि कोई भारतीय अपने दैनिक ज़रूरतों के क्रय विक्रय में रु. 589 प्रतिमाह, तक… आगे पढ़िये

Incredible India, The saga of Price Hike, पेट्रोल, मँहगाई
kidney

© चुनरी में दाग…./ नया सँशोधित सँस्करण 2011

May 10th

टाइमखोटीकार डॉ. अमर कुमार वर्ग बात बेबाक

7 टिप्पणियाँ

   खबर है, एक जिम्मेदार पुलिसतंत्र के ठीक नाक के नीचे एक गैरजिम्मेदार डाक्टर पूरी जिम्मेदारी से अनैतिक अंग प्रत्यारोपण का धंधा चला रहा था । भला कैसे भाई ? हमारी पुलिस तो इतनी सतर्क है कि वह चोरी – डकैती की योजना बनाते समय ही लोगों को गिरफ़्तार कर लेती है । अख़बार नहीं पढ़ते, आप ? कम से कम समाचारपत्रों में तो यही पढ़ने को मिलता है, ‘ तीन जुआरी रंगेहाथ जुआ खेलते पकड़े गये… गैरलाइसेंसी असलहे के साथ युवक बंदी.. चोरी की योजना बनाते हुये दो नक़बजन पुलिस ग़िरफ़्त में.. ! ’ अब एक महानगर की इतनी मुस्तैद पुलिस प्रशासन के एक पॉश हलके में डाक्टर साहब इतने टीमझाम के साथ कोई पाकेटमारी तो कर नहीं रहे थे ! बाकायदा तीन-चार अदद गुर्दे एक मानव आगे पढ़िये

Immoral Police, kidney theft, law of India, Medical ethics, कानून, गुर्दा, डॉक्टर
anokha pilot

प्रार्थनाओं के पँख पर सवार

May 1st

टाइमखोटीकार डॉ. अमर कुमार वर्ग बात बेबाक

13 टिप्पणियाँ

अरविन्द जी के विविधभारती ्पर बज रहा है…शर्म आती है मगर आज यह कहना होगा ! सो हम भी कहिये दे रहे रॅहे हैं । यह खुशदीप का मक्खन नहीं, मेरा ज़ेनुईन कैरेक्टर है.. कविरत्न भूलेलाल ’भुलक्क’ बड़ी मन्नतों के बाद मुद्दतों में एक कवि-सम्मेलन में न्योता मिला । समय कम था, फ़्लाईट से जाने का भौकाल ही कुछ और… बैठ लिये.. बोर्ड कर लिये भाई । जेब-वेब चेक किया टिकट-ऊकट है कि नहीं.. सब सलामत अपनी जगह पर मौज़ूद, इतमिनान की साँस लेकर पसर कर बैठ गये । प्रातः बेला थी, ईश्वर की असीम अनुकम्पा है, मुद्दतों बाद एक बुकिंग मिली है.. मगन होकर श्रीरामच्न्द्र कृपालु भज मन.. गुनगुनाने लगे । एकदम से जियरा धक्क… हाय रे हनुमान-चालीसा तो रखा नहीं.. क्या आगे पढ़िये

पाइलट, लाइसेन्स, हवाई सुरक्षा, फ़र्ज़ीवाड़ा
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